सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से भारत की बालिकाओं का सशक्तीकरण

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नई दिल्ली: सुकन्या समृद्धि योजना भारत की लाखों बालिकाओं के लिए आशा और सशक्तीकरण का एक शक्तिशाली प्रतीक बन चुकी है। यह बालिकाओं के सपनों को संवारने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के प्रति सरकार की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
२२ जनवरी २०१५ को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम के अंतर्गत इस योजना की शुरुआत की गई थी। इसे आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक परिवर्तन के बीच एक सेतु के रूप में परिकल्पित किया गया था। २२ जनवरी २०२६ को सुकन्या समृद्धि योजना अपने ११ वर्ष पूरे कर रही है। शुरुआत से अब तक ४.५३ करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं। प्रत्येक खाता एक बालिका की अपार संभावनाओं में विश्वास का प्रतीक है। एक बालिका को सशक्त बनाना परिवार, समाज और अंततः पूरे राष्ट्र को सशक्त बनाना है, यही भावना एसएसवाई को समानता और अवसर की दिशा में एक राष्ट्रीय आंदोलन बनाती है।
बालिकाओं का भविष्य सुरक्षित करने वाली सुकन्या समृद्धि योजना: यह कैसे काम करती है? क्या आप जानते हैं?
एसएसवाई योजना में वर्तमान वार्षिक ब्याज दर ८.२ प्रतिशत है, जो बालिकाओं के लिए लक्षित बचत योजनाओं में सबसे अधिक में से एक है। सुकन्या समृद्धि योजना एक कम जोखिम वाली बचत योजना है। सरकार मूलधन और निर्धारित दर पर ब्याज की गारंटी देती है। ब्याज दर हर तीन महीने में तय की जाती है और वार्षिक रूप से खाते में जोड़ी जाती है।
इस योजना का आर्थिक और सामाजिक दोनों ही महत्व है। यह देश की प्रत्येक बालिका के उज्ज्वल और समृद्ध भविष्य को सुनिश्चित करने में सहायक है। यह योजना मुख्य रूप से बालिकाओं की शिक्षा और विवाह से जुड़े खर्चों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाई गई है। शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के माध्यम से यह महिला सशक्तीकरण को मजबूत करती है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान देती है।
एसएसवाई खाता क्या है और इसे कौन खोल सकता है?
एसएसवाई खाता सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत जमा की गई राशि रखने के लिए खोला जाता है। अभिभावक अपनी बेटी के लिए किसी भी डाकघर, सरकारी बैंक या अनुमोदित निजी बैंक की शाखा में यह खाता खोल सकते हैं। बेटी के जन्म से लेकर उसके १० वर्ष पूरे होने तक किसी भी समय खाता खोला जा सकता है। एक बेटी के लिए केवल एक ही एसएसवाई खाता खोला जा सकता है। एक परिवार अधिकतम दो बेटियों के लिए खाते खोल सकता है। जुड़वां या ‘ट्रिपलेट’ के मामले में संबंधित जन्म प्रमाणपत्र और शपथपत्र जमा करने पर दो से अधिक खाते भी खोले जा सकते हैं।
यह खाता पूरे भारत में कहीं भी स्थानांतरित किया जा सकता है। बालिका के १८ वर्ष की आयु तक खाता अभिभावक द्वारा संचालित किया जाता है। १८ वर्ष पूरे होने के बाद आवश्यक दस्तावेज जमा कर बालिका स्वयं खाता संचालित कर सकती है। दिसंबर २०२५ तक एसएसवाई खातों में कुल जमा राशि ३.३३ लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।
न्यूनतम प्रारंभिक जमा २५० रुपये है। इसके बाद ५० रुपये के गुणकों में जमा किया जा सकता है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम २५० रुपये जमा करना अनिवार्य है। वार्षिक अधिकतम जमा सीमा १.५ लाख रुपये है। इससे अधिक जमा की गई राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा और उसे वापस कर दिया जाएगा। खाता खोलने की तिथि से अधिकतम १५ वर्षों तक जमा किया जा सकता है।
ब्याज की गणना कैसे होती है?
प्रत्येक माह ब्याज की गणना की जाती है और वित्तीय वर्ष के अंत में खाते में जोड़ दी जाती है। वर्ष के दौरान खाता किसी अन्य शाखा या डाकघर में स्थानांतरित होने पर भी वित्तीय वर्ष के अंत में ब्याज जमा होता है।
एसएसवाई खाते से राशि निकालने की सुविधा:
खाताधारक शिक्षा से संबंधित खर्चों के लिए पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में उपलब्ध शेष राशि का अधिकतम ५० प्रतिशत निकाल सकती है। यह सुविधा १८ वर्ष की आयु पूरी होने या कक्षा १० उत्तीर्ण करने के बाद उपलब्ध होती है। राशि एकमुश्त या किस्तों में निकाली जा सकती है। अधिकतम पाँच वर्षों तक, वर्ष में एक बार निकासी की अनुमति है और यह संबंधित शैक्षणिक संस्था द्वारा निर्धारित वास्तविक खर्च तक सीमित होती है।
खाता कब परिपक्व होता है? क्या इसे पहले बंद किया जा सकता है?
खाता खोलने की तिथि से २१ वर्ष पूरे होने पर खाता परिपक्व होता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में अग्रिम बंद करने की अनुमति है। विवाह के मामले में बालिका की आयु कम से कम १८ वर्ष होनी चाहिए और निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना आवश्यक है। खाताधारक की मृत्यु होने पर मृत्यु प्रमाणपत्र जमा कर तुरंत खाता बंद किया जा सकता है और ब्याज सहित राशि अभिभावक को दी जाती है। हालांकि, खाता खोलने के पहले पाँच वर्षों के भीतर अग्रिम बंद करने की अनुमति नहीं है।
सुकन्या समृद्धि योजना क्यों एक बुद्धिमान निर्णय है?
सुकन्या समृद्धि योजना एक सरकार समर्थित बचत योजना है। यह उच्च ब्याज दर, कर छूट और आसान निकासी सुविधाओं के माध्यम से बालिकाओं की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
आकर्षक ब्याज दर, आयकर अधिनियम की धारा ८०सी के तहत कर छूट, न्यूनतम जमा २५० रुपये और अधिकतम १.५ लाख रुपये, आंशिक निकासी की सुविधा, परिपक्वता के बाद खाता बंद न करने पर डाकघर बचत योजना की दर से ब्याज लागू, साथ-साथ बढ़ती हुई योजना सुकन्या समृद्धि योजना भारत की बालिकाओं के लिए सुरक्षित और सक्षम भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता देकर यह परिवारों में वित्तीय जिम्मेदारी और समाज में सकारात्मक बदलाव को प्रोत्साहित करती है। खातों की निरंतर वृद्धि इस योजना के प्रति जनता के विश्वास और इसके प्रभाव का प्रमाण है। लैंगिक समानता और समावेशन की ओर अग्रसर भारत में, सुकन्या समृद्धि योजना प्रत्येक बालिका को आत्मविश्वास और आवश्यक संसाधन प्रदान कर आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।

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