१० अप्रैल का इतिहास: टाइटैनिक जहाज अपनी पहली और आखिरी यात्रा पर निकला

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नई दिल्ली: १० अप्रैल का दिन विश्व इतिहास में कई अहम घटनाओं के लिए दर्ज है, लेकिन इस तारीख को सबसे ज्यादा याद किया जाता है टाइटैनिक जहाज की पहली यात्रा के लिए। साल १९१२ में इसी दिन ब्रिटेन के साउथहैम्पटन बंदरगाह से टाइटैनिक जहाज न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ था।
टाइटैनिक उस समय का सबसे आधुनिक और विशाल समुद्री जहाज माना जाता था। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया था कि अगर इसके किसी हिस्से में पानी भर भी जाए, तो बाकी हिस्से सुरक्षित रहें। इसी वजह से इसे “कभी न डूबने वाला जहाज” कहा जाता था।
हालांकि, यह दावा ज्यादा समय तक सही साबित नहीं हो सका। १४ अप्रैल १९१२ की रात को अटलांटिक महासागर में यह जहाज एक विशाल हिमखंड से टकरा गया। टक्कर के बाद जहाज में तेजी से पानी भरने लगा और कुछ ही घंटों में यह समुद्र में डूब गया।
इस हादसे में करीब १५०० से अधिक लोगों की जान चली गई। यह इतिहास की सबसे भीषण समुद्री दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है। इस त्रासदी ने समुद्री सुरक्षा नियमों में बड़े बदलाव लाने का काम किया।
१० अप्रैल की तारीख अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की भी गवाह रही है। साल १८७५ में इसी दिन स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की, जिसने भारतीय समाज में सुधार और शिक्षा के प्रसार में अहम भूमिका निभाई।
इसके अलावा, १८९४ में प्रसिद्ध उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला का जन्म हुआ, जबकि १९३० में पहली बार कृत्रिम रबर का उत्पादन किया गया। १९७२ में ईरान में आए भीषण भूकंप में हजारों लोगों की मौत हुई थी।
हाल के वर्षों में भी यह तारीख महत्वपूर्ण रही है। २०१० में पोलैंड के राष्ट्रपति और कई वरिष्ठ अधिकारियों की विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी। वहीं २०१६ में केरल के एक मंदिर में भीषण आग लगने से सैकड़ों लोग प्रभावित हुए थे।
इस तरह, १० अप्रैल का दिन इतिहास के कई अहम और यादगार घटनाओं को अपने साथ समेटे हुए है।

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