ज़ायडस ने भारत में लॉन्च किया दोबारा इस्तेमाल होने वाला मल्टी-डोज़ पेन डिवाइस में सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन

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नई दिल्ली: वैश्विक नवोन्मेष आधारित लाइफसाइंसेज़ कंपनी, ज़ायडस लाइफसाइंसेज़ लिमिटेड, ने भारत में पेटेंट की समय-सीमा समाप्त होने के बाद सेमाग्लिनटी™, माशेमाटी™ और ऑल्टरमी™ ब्रांड नामों के तहत सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन लॉन्च किया है। भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने टाइप २ डायबिटीज़ मेलिटस और मोटापे दोनों के इलाज के लिए इसके निर्माण और विपणन की मंज़ूरी पहले ही दे दी है।
मल्टी-डोज़ पेन डिवाइस से बढ़ेगी सुविधा:
अब तक इलाज के लिए मरीज़ों को अक्सर अपनी खुराक धीरे-धीरे बढ़ाने के लिए कई सिंगल-डोज़ पेन खरीदने पड़ते थे। ज़ायडस ने इसके विपरीत एक नया, दोबारा इस्तेमाल होने वाला मल्टी-डोज़ पेन डिवाइस पेश किया है।
इस नवोन्मेष से डॉक्टरों और मरीज़ों को एक ही पेन से अलग-अलग खुराक आसानी से चुनने में मदद मिलेगी। इससे इलाज को नियमित बनाए रखना आसान होगा, सुविधा बढ़ेगी और इलाज का कुल खर्च भी काफी कम होगा।
कंपनी के अनुसार, सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन १५ मिलीग्राम/३ मिलीलीटर कार्ट्रिज में उपलब्ध होगा और इसका निर्माण ज़ायडस बायोटेक पार्क, अहमदाबाद में किया जाएगा। इस इलाज का औसत मासिक खर्च लगभग २,२०० रुपये होगा।
भारत में बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती:
आज डायबिटीज़ और मोटापा भारत की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हैं। जीएलपी-१ आधारित इलाज इस बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता को दूर करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन के अनुसार, भारत में लगभग ८.९ करोड़ वयस्क डायबिटीज़ के साथ जीवन जी रहे हैं, जो देश की वयस्क आबादी का १०.५ प्रतिशत है।
साथ ही, सभी आयु वर्गों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। वयस्कों में महिलाओं में मोटापे की दर १२.६ प्रतिशत से बढ़कर २४.० प्रतिशत (लगभग ९१ प्रतिशत वृद्धि) हो गई है, जबकि पुरुषों में यह ९.३ प्रतिशत से बढ़कर २२.९ प्रतिशत (करीब १४६ प्रतिशत वृद्धि) हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये रुझान देश में गहराते स्वास्थ्य संकट को रेखांकित करते हैं और ऐसे नए उपचार विकल्प इस समस्या से निपटने में अहम साबित हो सकते हैं।

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