स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सिलीगुड़ी : बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर जारी घमासान के बीच सड़कों पर तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी का कार्यकर्ता भिड़ गए। इस दौरान मुर्शिदाबाद में पुलिस की गाड़ी पर पथराव भी किया गया। बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें फॉर्म- ७ जमा करने से रोक दिया, जिसके बाद विवाद हुआ. इस दौरान पुलिस के सामने बीजेपी कार्यकर्ता की गाड़ी में तोड़फोड़ की गई और फॉर्म में आ*ग लगा दी गई।

बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उन्हें फॉर्म-७ जमा करने से रोक दिया, जिसके बाद विवाद हुआ। इस दौरान पुलिस के सामने बीजेपी कार्यकर्ता की गाड़ी में तोड़फोड़ की गई और फॉर्म में आग लगा दी गई। बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, और इसके कारण कई इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है।

ईस्ट बर्दवान में हाल ही में SIR हियरिंग के दौरान बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हियरिंग केंद्र के पास कार्यकर्ताओं के टकराव से स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा। इस झड़प में कुछ कार्यकर्ताओं को मामूली चोटें भी आई हैं, जबकि पुलिस ने स्थिति को काबू में करने के लिए स्थानीय सुरक्षा बल तैनात किए।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि SIR को लेकर यह घमासान चुनावी रणनीति का हिस्सा है। टीएमसी और बीजेपी दोनों ही दल मतदाता सूची में संशोधन और नए नामों के जोड़-घटाव को लेकर जनता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी कुछ मतदाताओं के नाम अनुचित रूप से हटा रही है, जबकि टीएमसी का दावा है कि बीजेपी कार्यकर्ता मतदाता सूची में हेरफेर की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में स्थिति को शांत करने के लिए सख्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं। पुलिस ने हियरिंग केंद्रों पर अतिरिक्त बल तैनात किया और कार्यकर्ताओं को संयम बरतने का निर्देश दिया।

अधिकारियों ने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) का उद्देश्य केवल वोटिंग प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाना है। लेकिन चुनावी माहौल में इसे राजनीतिक दल अपनी रणनीति के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे न केवल मतदाता प्रभावित होते हैं, बल्कि स्थानीय शांति और कानून व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव राजनीतिक संघर्ष और प्रतिद्वंद्विता का नया मोड़ लेने जा रहे हैं। दोनों दल अपने-अपने आधार पर चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं, और एसआईआर इसी रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में मतदाता सूची संशोधन और हियरिंग के दौरान और भी कई विवाद सामने आ सकते हैं।

ऐसे में प्रशासन और पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का महत्व और बढ़ जाता है। इस प्रकार, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच SIR को लेकर हिंसक झड़पों ने यह दिखा दिया है कि राजनीतिक तापमान तेज हो चुका है, और राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।बंगाल में एसआईआर को लेकर अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन हो रहे हैं. इस बीच सोमवार (१९ जनवरी २०२६) को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल में ग्राम पंचायत भवनों, तालुका प्रखंड कार्यालयों और वार्ड कार्यालयों में तार्किक विसंगतियों की लिस्ट में शामिल लोगों के नाम प्रदर्शित करने का निर्देश दिया।

चीफ जस्टिस यूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर से प्रभावित होने की संभावना वाले लोगों को अपने दस्तावेज या आपत्तियां प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दस्तावेज और आपत्तियां प्रस्तुत करने के लिए कार्यालय पंचायत भवनों या ब्लॉक कार्यालयों के भीतर स्थापित किए जाएंगे।कोर्ट का मानना है कि इससे प्रभावित लोगों को समय रहते अपनी स्थिति की जानकारी मिल सकेगी. इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति सूचना के अभाव में अपने अधिकारों से वंचित न रहे. कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन लिस्टों को तुरंत लोकल सरकारी दफ्तरों के नोटिस बोर्ड पर चिपकाया जाए ताकि लोग इन्हें आसानी से देख सकें.

दस्तावेज जमा करने की बढ़ी समय सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों को बड़ी राहत दी है जिनके कागजों में कोई कमी मिली है. कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर कागज जमा करने की आखिरी तारीख निकल भी गई है, तो भी उनके फॉर्म और डॉक्यूमेंट्स ले लिए जाएं. लोग खुद जाने के बजाय अपने किसी प्रतिनिधि को भेजकर भी कागज जमा करा सकते हैं. पंचायत या ब्लॉक ऑफिस में लिस्ट लगने के 10 दिनों के अंदर कोई भी अपनी शिकायत या आपत्ति दर्ज करा सकता है. इसके लिए सरकार को हर पंचायत और ब्लॉक ऑफिस में विशेष डेस्क बनाने को कहा गया है ताकि लोगों को दूर न भटकना पड़े.

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ममता सरकार को सख्त हिदायत
मामला गंभीर होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार को राज्य में शांति बनाए रखने के सख्त आदेश दिए हैं. कोर्ट ने कहा है कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान कहीं भी हिंसा या हंगामा नहीं होना चाहिए. सरकार की यह जिम्मेदारी होगी कि वह चुनाव आयोग को जरूरत के हिसाब से कर्मचारी और अधिकारी दे ताकि काम न रुके. प्रशासन को हर हाल में यह पक्का करना होगा कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनी रहे और लोगों को कोई परेशानी न हो.

पंचायत और ब्लॉक स्तर पर की जाएगी विशेष व्यवस्था
आम जनता की सुविधा के लिए कोर्ट ने आदेश दिया है कि कागज जमा करने और शिकायतों को सुलझाने के लिए गांव की पंचायत और ब्लॉक लेवल पर ही ऑफिस बनाए जाएं. इन दफ्तरों में अधिकारी मौजूद रहेंगे जो लोगों की बात सुनेंगे और उनके कागजों की जांच करेंगे. यह इंतजाम इसलिए किया गया है ताकि गांव वालों को बड़े शहरों के चक्कर न काटने पड़ें और उन्हें अपने घर के पास ही मदद मिल जाए. अब राज्य सरकार को जल्दी से ये केंद्र शुरू करने होंगे ताकि तय समय में सभी शिकायतों का निपटारा हो सके।

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