नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गतिविधियाँ देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं। सरकार ने आरोप लगाया कि वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसी स्थिति में धकेलना चाहते हैं और उनके भाषण युवाओं को भड़काने वाले तथा देश की एकता के विरुद्ध हैं।
लद्दाख हिंसा मामले में वांगचुक की गिरफ्तारी के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह दलील दी। उन्होंने कहा कि वांगचुक के वक्तव्यों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा प्रत्यक्ष और स्पष्ट खतरा दिखाई देता है।
मेहता ने न्यायालय को बताया कि जिला मजिस्ट्रेट ने परिस्थितियों का आकलन करते हुए उनकी गिरफ्तारी का उचित निर्णय लिया। नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों का उदाहरण देकर भाषण देना युवाओं को उकसाने और देश विरोधी वातावरण बनाने के समान है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार है।
उल्लेखनीय है कि २४ सितंबर २०२५ को लेह में हिंसा भड़काने के आरोप में २६ सितंबर को सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था। वर्तमान में वे जोधपुर केंद्रीय कारागार में बंद हैं। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को दोपहर दो बजे होगी।










