अंटार्कटिका की सर्वोच्च चोटी माउंट विन्सन मासिफ पर सफल आरोहण
गंगटोक/अंटार्कटिका: सिक्किम की प्रतिष्ठित पर्वतारोही मनीता प्रधान ने अंटार्कटिका की सबसे ऊँची चोटी माउंट विन्सन मासिफ पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारतीय पर्वतारोहण को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। विश्वप्रसिद्ध ‘सेवन समिट्स’ चुनौती को पूरा करने से अब वह केवल एक शिखर दूर हैं।
माउंट विन्सन मासिफ की यह चढ़ाई मनीता प्रधान के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट सेवन समिट्स’ का अहम हिस्सा है, जिसके तहत सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर आरोहण का लक्ष्य रखा गया है। इस सफलता के साथ उन्होंने छह महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियों पर चढ़ाई पूरी कर ली है। अब केवल ऑस्ट्रेलिया की माउंट कोसियसको चोटी शेष है।
मनीता प्रधान ने १ दिसंबर २०२५ को राजधानी गंगटोक से अपने अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क, पुंटा एरेनास और अंटार्कटिका के प्रमुख पर्वतारोहण आधार शिविर यूनियन ग्लेशियर कैंप होते हुए माउंट विन्सन बेस कैंप तक की कठिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी की। १० दिसंबर को बेस कैंप से शिखर की ओर अंतिम चढ़ाई शुरू हुई।
-३१ डिग्री सेल्सियस तक गिरते तापमान, तेज हवाओं और खड़ी ढलानों जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद मनीता प्रधान ने अद्भुत साहस, सहनशक्ति और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। कई दिनों के संघर्ष के बाद उन्होंने १२ दिसंबर २०२५ की रात ८:३० बजे (स्थानीय समय) माउंट विन्सन मासिफ के शिखर को सफलतापूर्वक छुआ। इसके साथ ही वह अंटार्कटिका की सर्वोच्च चोटी पर पहुँचने वाली चुनिंदा भारतीय महिलाओं में शामिल हो गई हैं।
शिखर और बेस कैंप पर उन्होंने सिक्किम राज्य स्थापना के ५० वर्ष पूरे होने की स्मृति में विशेष ध्वज फहराया, जो उनकी मातृभूमि के प्रति गहरे सम्मान और गर्व को दर्शाता है।
अपने अभियान के दौरान मिले सहयोग और प्रोत्साहन के लिए मनीता प्रधान ने सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों के निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया है। यह जानकारी सिक्किम वेटरन्स माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के सदस्य बब्बू तमांग ने दी।

बब्बू तमांग के अनुसार, माउंट विन्सन मासिफ पर मनीता प्रधान की यह सफलता न केवल उनके लिए, बल्कि सिक्किम और पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है। ‘सेवन समिट्स’ परियोजना के तहत यह उनकी छठी सफल चढ़ाई है। अपने साहस और समर्पण से वह विशेष रूप से युवा महिला पर्वतारोहियों को सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दे रही हैं।










