नई दिल्ली: ईरान पर संभावित अमेरिकी सैन्य हमले की आशंका बनी हुई है, लेकिन सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित कई खाड़ी देशों ने अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी हमले के लिए न होने देने की घोषणा कर तनाव कम करने का संकेत दिया है।
सऊदी अरब, यूएई, क़तर और ओमान अमेरिका तथा ईरान—दोनों से संपर्क में हैं। इन देशों की कोशिश है कि क्षेत्र में युद्ध की स्थिति टाली जा सके। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर समझौते का दबाव बना रहे हैं और चेतावनी दे चुके हैं कि समय समाप्त हो रहा है।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने मिसाइल कार्यक्रम और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा कि समझौते धमकियों के आधार पर नहीं होते।
तुर्की ने भी इस तनाव में कूटनीतिक भूमिका निभाते हुए चेतावनी दी है कि इसराइल अमेरिका को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए उकसा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी और यूएई के फैसले से अमेरिकी सैन्य योजना जटिल जरूर होगी, लेकिन पूरी तरह असंभव नहीं। अमेरिका समुद्री मार्गों, विमानवाहक पोतों और अन्य देशों के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर कार्रवाई कर सकता है।
अरब और मुस्लिम देशों को आशंका है कि किसी भी हमले से मध्य-पूर्व में व्यापक संघर्ष भड़क सकता है और ईरान खाड़ी क्षेत्र में तेल व गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है।











