नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने संसद में उत्तर–पूर्व भारत से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए बुनियादी ढांचा विकास, रेल एवं सड़क संपर्क तथा इस क्षेत्र की विशाल पर्यटन संभावनाओं पर विशेष जोर दिया। स्पष्ट और उद्देश्यपूर्ण वक्तव्य में उन्होंने चल रही परियोजनाओं की प्रगति, केंद्रीय निधियों के उपयोग तथा इन पहलों से आम नागरिकों को मिल रहे प्रत्यक्ष लाभों की जानकारी मांगी। साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विदेशी गंतव्यों के बजाय भारतीयों को उत्तर–पूर्व भारत की यात्रा क्यों करनी चाहिए और सुदृढ़ संपर्क व्यवस्था किस प्रकार इस क्षेत्र के भविष्य को रूपांतरित कर सकती है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयोजित ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट समिट’ का उल्लेख करते हुए श्री श्रृंगला ने कहा कि सम्मेलन के बाद उत्तर–पूर्वी क्षेत्र में घोषित निवेशों को धरातल पर उतारने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं, इसका विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए। जवाबदेही और परिणामों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सम्मेलन में किए गए वादे रोजगार सृजन और सतत विकास को बढ़ावा देने वाली ठोस परियोजनाओं के रूप में साकार होने चाहिए।
पर्यटन के संदर्भ में हर्षवर्धन श्रृंगला ने उत्तर–पूर्व भारत को अपार प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति तथा इको, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन के क्षेत्रों में विशाल लेकिन अभी तक पूर्ण रूप से अप्रयुक्त संभावनाओं वाला क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर–पूर्व भारत के दूरदराज़ इलाकों को देश के अन्य भागों से जोड़ने वाली रेल संपर्क परियोजनाएं अब वास्तविकता बन रही हैं, जो एकीकरण और अवसरों का प्रतीक हैं। इससे बाजारों की दूरी कम होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलेगी। उनके अनुसार, यह संपर्क व्यवस्था केवल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच संबंधों को भी सुदृढ़ करेगी।
संसद में अपने वक्तव्य का हवाला देते हुए श्री श्रृंगला ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर–पूर्व भारत के साथ गहरा और आत्मीय संबंध स्थापित किया है। पिछले छह दशकों में लगातार आई सरकारें इस क्षेत्र की संभावनाओं को सही मायने में पहचान नहीं सकीं। प्रधानमंत्री ने उन संभावनाओं को समझते हुए उन्हें मुक्त किया है। उनके उद्घाटन में आयोजित हालिया उत्तर–पूर्व निवेशक सम्मेलन में निवेशकों ने ४.३ लाख करोड़ रुपये के निवेश में रुचि दिखाई है।”
समय-समय पर हर्षवर्धन श्रृंगला ने नागरिकों से सीधे जुड़े मुद्दों को संसद में उठाया है। चाहे वह स्वास्थ्य हो, शिक्षा हो, संपर्क व्यवस्था हो या आजीविका का प्रश्न- दार्जिलिंग और समूचे उत्तर–पूर्व भारत के लोगों की आवाज़ को वे लगातार देश के सर्वोच्च मंच तक पहुंचाते रहे हैं। उनके ये प्रयास केवल राजनीतिक दायित्व का निर्वहन नहीं, बल्कि क्षेत्र के प्रति गहरी संवेदना, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाते हैं।









