शैक्षिक हब स्थापित कर वैश्विक विस्तार की ओर टिसिजी क्रेस्ट

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कोलकाता: टिसिजी क्रेस्ट (डीम्ड विश्वविद्यालय) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण विस्तार योजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वैश्विक शोध सहयोग और अंतर-क्षेत्रीय सहभागिता को और गहरा करने की दीर्घकालिक रणनीति के तहत यूनाइटेड किंगडम (यूके), जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) में शैक्षिक केंद्र स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। शोध-केंद्रित नीति के अनुरूप, विश्वविद्यालय ने १,००० पीएचडी शोधार्थियों को नामांकित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इससे उच्च-स्तरीय शोध प्रतिभा के निर्माण में टिसिजी क्रेस्ट की भूमिका और मजबूत होगी तथा भारत को अत्याधुनिक ज्ञान और नवाचार में एक वैश्विक योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
इस डीम्ड विश्वविद्यालय ने स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज़ तथा स्कूल ऑफ हेल्थ, एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी स्टडीज़ की शुरुआत की घोषणा भी की है, जिससे मूल और प्राकृतिक विज्ञानों से परे इसकी शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तार होगा।
स्कूल ऑफ हेल्थ, एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी स्टडीज़ सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरणीय प्रणालियों और सतत विकास के संगम पर शोध और शिक्षा पर केंद्रित रहेगा। वहीं, स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज़ समाज, संस्कृति, इतिहास और मानवीय मूल्यों से जुड़े अध्ययनों को आगे बढ़ाते हुए वैज्ञानिक शोध की सामाजिक प्रासंगिकता और आधार को सुदृढ़ करेगा।
टिसिजी क्रेस्ट के चेयरपर्सन एवं चांसलर डॉ. पूर्णेन्दु चट्टोपाध्याय ने कहा, “टिसिजी क्रेस्ट का यह अगला चरण भारत की दीर्घकालिक आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम संस्था के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है। जब भारत आत्मनिर्भर, ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है, तब क्रेस्ट भविष्य-उपयुक्त प्रतिभा तैयार करने, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों की प्रगति और देश के विकास व वैश्विक स्थिति के लिए आवश्यक क्षेत्रों में समाधान प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभाएगा। हमारा ध्यान ऐसी टिकाऊ शैक्षणिक और शोध क्षमता के निर्माण पर है, जो आने वाले दशकों तक राष्ट्र की सेवा कर सके।”
टिसिजी समूह के प्रेसिडेंट जेरेमी रंजन घोष ने कहा, “टिसिजी क्रेस्ट के विस्तार के साथ-साथ हम गहरे उद्योग-संबंध, अनुप्रयोग-मुखी बहुविषयक शोध और प्रतिभा विकास के माध्यम से शैक्षणिक शोध से वास्तविक दुनिया में उपयोग के लिए संस्थागत क्षमता का निर्माण कर रहे हैं। यह विकास चरण हमारे इस विश्वास को दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विश्वविद्यालय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के केंद्र में होते हैं, और जब शिक्षा एवं उद्योग साथ-साथ आगे बढ़ते हैं तभी दीर्घकालिक मूल्य का सृजन होता है।”

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