डुअर्स: एक दिन पहले, तृणमूल के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी ने अलीपुरद्वार में एक मीटिंग से ऐलान किया कि अगर वे राज्य में चौथी बार सत्ता में आए तो चाय मज़दूरों की रोज़ की मज़दूरी बढ़ाकर ३०० रुपये कर दी जाएगी। रविवार को दार्जिलिंग के एमपि राजू बिष्ट ने बदले में मांग की, ‘अगर नया लेबर लॉ लागू होता है तो मज़दूरों को कम से कम ३५० रुपये रोज़ की मज़दूरी मिलेगी।’ यानी, वोट से पहले दोनों पार्टियों ने चाय मज़दूरों की मज़दूरी पर असल में मोलभाव कर लिया।
मज़दूरों के हितों को ध्यान में रखकर लेबर लॉ लाया गया है। हर राज्य में इस कानून को लागू करना ज़रूरी है। केंद्रीय लेबर मिनिस्टर मनसुख मंडाव्या ने रविवार को सिलीगुड़ी आने पर यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘मज़दूरों के हितों की रक्षा के लिए देश भर में चार लेबर कोड लाए गए हैं। इसके चलते, मालिक को मज़दूरों को सही मज़दूरी, हेल्थ सर्विस और दूसरी सभी सुविधाएँ देनी होंगी।’
हालांकि, तृणमूल के राज्यसभा एमपि और लेबर पर पार्लियामेंट्री कमिटी के मेंबर रीताब्रत बनर्जी ने केंद्रीय मंत्री की बातों का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा, ‘लेबर कानून केंद्र और राज्यों का मिला-जुला मामला है। अगर राज्यों के बीच कोई झगड़ा होता है, तो केंद्र उसे लागू नहीं कर सकता। लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार ने राज्यों के विरोध को नज़रअंदाज़ करते हुए यह कानून लागू किया है। राज्य इस कानून को मानने के लिए मजबूर नहीं हैं जो मज़दूरों के हितों के खिलाफ है।’
रविवार को, केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाव्या ने सिलीगुड़ी के नॉर्थ बंगाल मारवाड़ी भवन में चाय बागान मज़दूरों से मुलाकात की। मैदानी इलाकों के साथ-साथ पहाड़ी इलाकों के कुछ चाय बागानों के मज़दूरों को भी वहाँ मौजूद कराया गया था। मीटिंग में बीजेपी से जुड़ी राजनीतिक पार्टियों के मज़दूर संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। हालांकि, आरोप है कि तृणमूल टी वर्कर्स ऑर्गनाइज़ेशन को नहीं बुलाया गया था। हालांकि एमपि बिष्ट ने दावा किया कि सभी संगठनों को बुलाया गया था।
वह मीटिंग में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “चाय मज़दूरों के लिए कई पुराने कानून लागू थे। हमने आज के समय के हिसाब से नया लेबर कानून लागू किया है। इस लेबर कोड में सभी मज़दूरों को हेल्थ प्रोटेक्शन मिलेगा। भारत सरकार द्वारा तय मिनिमम वेज, मज़दूरों के परिवारों के बच्चों की सही पढ़ाई, साथ ही इएसआई, ग्रेच्युटी और दूसरी सभी सुविधाएं मिलेंगी। अगर किसी चाय बागान में १० मज़दूर भी हैं, तो उन्हें इस कानून के ज़रिए वह मौका देना होगा। इसलिए, इस कानून को हर राज्य के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में भी लागू करना ज़रूरी है।”
आज की मीटिंग में दार्जिलिंग के एमपि राजू बिष्ट भी मौजूद थे। उन्होंने दावा किया, “अभिषेक बनर्जी चाय मज़दूरों के लिए ३०० रुपये की मज़दूरी की बात कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने इतने सालों में क्या किया है?” बिष्ट ने चुनाव से पहले राज्य सरकार द्वारा नॉर्थ बंगाल के चाय बागानों में स्कूल बसें देने पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, “यह स्कूल बस नहीं है, यह चुनाव बस है। राज्य सरकार को १५ साल से चाय मज़दूरों के बच्चों की याद नहीं आई। अब जब चुनाव का समय आया है, तो स्कूल बसें दी जा रही हैं। चाय इंडस्ट्री में मिनिमम वेज तय करना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी है। लेकिन राज्य ऐसा करने में नाकाम रहा है।”










