‘लाल सलाम’ से गूंज उठा मैदान, बुद्धदेव के बाद वामपंथियों की पहली ब्रिगेड में हजारों समर्थकों ने भरी हुंकार

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कोलकाता: २० अप्रैल को ब्रिगेड के मैदान लाल झंडे से रंग गया। मुर्शिदाबाद, मालदह, बीरभूम, नदिया और कृष्णनगर से हजारों की संख्या में वामपंथी समर्थक उमड़े। भीषण गर्मी में भी दूर-दराज से भारी संख्या में लोग ब्रिगेड पहुंचे। हाथों में लाल झंडा लिए खेतों मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए अपने नेताओं को सुनने पहुंचे। ब्रिगेड में आए वामपंथी कार्यकर्ताओं अप्रैल की चिलचिलाती धूप और पसीने से परेशान होकर भी अंडा और चावल खाकर अपना हक मांगने पहुंचे।
आखिरी बार ब्रिगेड फरवरी २०१९ को देखा गया था। वर्ष २०२४ में वामपंथी छात्र युवा ब्रिगेड के दौरान गंभीर रूप से बीमार बुद्धदेव ने भी मीनाक्षी मुखर्जी के माध्यम से संदेश भेजा था। पिछले वर्ष ब्रिगेड रैली से एक दिन पहले वामपंथी युवा संगठन के नेता बुद्धदेव के घर उन्हें संदेश देने गए थे। यह पहली बार है जब वामपंथी उनकी मृत्यु के बाद इतनी बड़ी रैली आयोजित कर रहे हैं। इस बार रैली में हजारों की संख्या में जिलों से आए खेतों में काम करने वाले मजदूर थे तो कोई दिहाड़ी मजदूर। अपनी आवाज को आला अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए कोई ट्रेन से सुबह ४ बचे पहुंच गए तो कोई ट्रकों पर सवार होकर कोलकाता पहुंचे।
‘पार्टियां आती – जाती हैं, लेकिन यह सरकार हमारा खून पी रही है’:
राज्य सरकार के खिलाफ लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। ब्रिगेड में शामिल हुए एक समर्थक ने कहा कि इस राज्य में पहले भी अन्य पार्टियों ने शासन किया है, लेकिन जिस प्रकार से वर्तमान सत्तारूढ़ दल भ्रष्टाचार और आम जनता पर अत्याचार कर रही है, यह काफी शर्मनाक बात है। हम अब इस सरकार से आजादी चाहते हैं। लोगों ने भरोसा कर के उस पार्टी को जीत दिलाई थी, लेकिन इस सरकार ने लोगों के साथ विश्वासघाट किया है। आरजीकर से लेकर एसएससी तक, सरकार ने बस लोगों का खून पीया है। अब समय आ गया है कि हमें अपनी लड़ाई और बुलंद करनी होगी।
व्हील चेयर पर सवार होकर रैली में शामिल हुआ टीबी का मरीज
हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच तीस वर्ष की उम्र वाला एक युवक शहंशाह भी शामिल हुआ जो कई वर्षों से टीबी की बीमारी से ग्रसित हैं। वह वामपंथियों के हर ब्रिगेड में आते हैं। शाहजहां ने कहा कि मैं अपने स्कूल के दिनों से ही यहां आता रहा हूं। इससे पहले वह एसएफआई करते थे। फिर डीवाईएफआई। हालांकि, टीबी की बीमारी ने उन्हें पार्टी के लिए कार्य करने लायक तो नहीं छोड़ा, लेकिन वे ब्रिगेड के जुनून उन्हें यहां जरूर खींच लाते हैं। अपनी शारीरिक समस्याओं को एक तरफ रखकर वह रात में साइकिल चलाकर ब्रिगेड तक पहुंचे।

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