राजपाल की जमानत के पीछे की जटिलताओं पर अभिनेता के वकील ने खोला राज़

IMG-20260217-WA0079

मुम्बई: अभिनेता राजपाल यादव को जमानत मिल गई है, लेकिन कानूनी पेचीदगियों को दूर कर उनकी जमानत कराना बिल्कुल भी आसान नहीं था। यह बात राजपाल के वकील भास्कर उपाध्याय ने बताई। ९ करोड़ रुपये का ऋण न चुका पाने के आरोप में राजपाल कानूनी विवाद में फंस गए थे। उन्होंने स्वयं तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया था। इस कानूनी विवाद की शुरुआत वर्ष २०१० में एक निर्माण कंपनी से जुड़े मामले से हुई थी।
राजपाल के बारे में उनके वकील का कहना है, “वह वकील नहीं हैं, इसलिए कानून की बारीकियां विस्तार से नहीं समझते। वह एक अभिनेता हैं, एक पारिवारिक व्यक्ति हैं। उन्होंने अदालत से स्पष्ट कहा था, ‘जो भी बकाया है, मैं पूरा ऋण चुका दूंगा।’ इस परियोजना में राजपाल का स्वयं का भी योगदान था। वह इस मामले से भागे नहीं हैं।”
भास्कर उपाध्याय ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता वास्तव में धन नहीं चाहते थे, बल्कि वे चाहते थे कि राजपाल को कारावास हो। उनके अनुसार, “यदि केवल पैसे का मामला होता तो स्थिति अलग होती, लेकिन इसके पीछे दुर्भावनापूर्ण मंशा थी।” शिकायत में कथित तौर पर राजपाल को सीधे जेल भेजने की भी मांग की गई थी।
गत सोमवार को इस मामले की सुनवाई हुई। दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि सोमवार दोपहर ३ बजे तक शिकायतकर्ता पक्ष के नाम डेढ़ करोड़ रुपये का मांग पत्र जमा किया जाए। निर्धारित समय के भीतर राशि जमा करने के बाद अभिनेता को अंतरिम जमानत मिल गई।
उल्लेखनीय है कि यह मामला ‘चेक बाउंस’ से संबंधित आरोपों से शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता पक्ष के वकील अवनीत सिंह सिक्का का दावा है कि राजपाल ने कुल सात चेक पर हस्ताक्षर किए थे, जिनमें प्रत्येक की राशि डेढ़ करोड़ रुपये थी। चेक बाउंस होने के बाद अदालत ने प्रत्येक मामले में उन्हें तीन-तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक चेक के लिए १ करोड़ ३५ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

About Author

Advertisement