रहमान को धर्म परिवर्तन का सुझाव देकर विवादों में अनुप जलोटा

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मुंबई: क्या मुस्लिम धर्मावलंबी होने पर बॉलीवुड में काम मिलना मुश्किल हो जाता है? भाजपा के सत्ता में आने के बाद क्या हिंदी फिल्म उद्योग में धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति हावी हो गई है? ए.आर. रहमान की हालिया टिप्पणी ने ऐसे कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पर न सिर्फ मनोरंजन जगत में बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी व्यापक चर्चा हो रही है। हालांकि रहमान के दावे को खारिज करते हुए भाजपा ने उदाहरण के तौर पर शाहरुख–सलमान के तीन दशक लंबे ‘खान साम्राज्य’ का हवाला दिया है, लेकिन यह विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा।
इसी बीच ऑस्कर विजेता ए.आर. रहमान के ‘सांप्रदायिक विभाजन’ से जुड़े बयान पर वरिष्ठ गायक अनुप जलोटा ने प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में एक साक्षात्कार में ए.आर. रहमान ने दावा किया था।
“पिछले आठ वर्षों में सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ बॉलीवुड में मेरा काफी काम छिन गया है। इसके पीछे सांप्रदायिक विभाजन की नीति भी हो सकती है। हालांकि किसी ने यह बात सीधे मेरे सामने नहीं कही, लेकिन कानाफूसी के तौर पर ऐसी बातें मैंने सुनी हैं।
इसी टिप्पणी को लेकर अनुप जलोटा ने ऑस्कर विजेता संगीतकार को दोबारा धर्म परिवर्तन करने का सुझाव दे दिया। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में वरिष्ठ गायक जलोटा ने कहा, “संगीत निर्देशक ए.आर. रहमान मूल रूप से हिंदू थे। बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार किया। उसके बाद उन्होंने इंडस्ट्री में खूब काम किया, नाम कमाया और बहुत सारा प्यार भी पाया। लेकिन अगर अब रहमान को लगता है कि धर्म की वजह से भारत में उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है, तो उन्हें फिर से हिंदू धर्म अपनाने के बारे में सोचना चाहिए।
इतना ही नहीं, व्यंग्यात्मक लहजे में रहमान पर तंज कसते हुए जलोटा ने आगे कहा, “कम से कम इतना आत्मविश्वास तो होना चाहिए कि हिंदू धर्म में लौटने पर इंडस्ट्री में फिर से काम मिलना शुरू हो जाएगा। उस इंटरव्यू से मैंने तो यही समझा है। इसलिए मैं जोरदार तरीके से सुझाव देता हूं कि रहमान फिर से हिंदू धर्म में लौटें और देखें कि उन्हें काम मिलता है या नहीं!” जलोटा के इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है।
कुछ लोगों का कहना है, “सनातन धर्म कोई खेल नहीं है, एक बार त्याग देने के बाद चाहने मात्र से दोबारा उसे अपनाकर ‘सच्चा हिंदू’ नहीं बना जा सकता।” वहीं अन्य लोगों की राय है, “धर्म हर व्यक्ति का निजी विषय है, इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।” अनुप जलोटा के इस तरह के बयान की विभिन्न वर्गों में कड़ी आलोचना हो रही है।

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