नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। इन पर मिजोरम में अवैध रूप से प्रवेश करने और म्यांमार सीमा में जाने का आरोप है। सभी को पूछताछ के लिए रिमांड पर भेजा गया है।
इस मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक ईसाई देश बनाने की कोई साजिश चल रही है। इस संदर्भ में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पुरानी चेतावनी फिर चर्चा में आ गई है।
शेख हसीना ने पहले ही दी थी चेतावनी:
करीब दो साल पहले, जब शेख हसीना सत्ता में थीं, उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका भारत के पूर्वोत्तर, म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक ईसाई देश बनाना चाहता है।
उन्होंने कहा था कि एक अमेरिकी व्यक्ति ने उनसे इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी और संकेत दिया था कि अगर वह इसे मान लें तो उनकी सत्ता सुरक्षित रह सकती है। हालांकि, हसीना ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
क्या कर रहे थे विदेशी नागरिक?
जांच एजेंसियों के अनुसार:
ये सभी विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे।
बिना अनुमति मणिपुर में प्रवेश किया।
म्यांमार और भारत के अलगाववादी समूहों से संपर्क किया।
उन्हें ड्रोन से जुड़ी तकनीक, पुर्जे और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया।
उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें ११ दिनों की रिमांड पर भेजा गया है, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
रक्षा विशेषज्ञ ने जताई आशंका:
रक्षा विश्लेषक उत्तम कुमार देवनाथ ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य चीन के खिलाफ एक रणनीतिक ठिकाना बनाना हो सकता है।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि गिरफ्तार किए गए लोग किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर और पड़ोसी देशों के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक अलग ईसाई राष्ट्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
देवनाथ के अनुसार, इस मामले में विदेशी खुफिया एजेंसियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।









