नई दिल्ली: अहमदाबाद में पिछले वर्ष आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में महाराष्ट्र के युवा खिलाड़ी साईराज परदेसी ने कई रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता था, जिससे खेल मंत्रालय और भारतीय भारोत्तोलन महासंघ में खुशी की लहर दौड़ गई थी। उनका प्रदर्शन बेहद शानदार माना गया था।
साईराज ने ८८ किलोग्राम भार वर्ग में कुल ३४८ किलोग्राम वजन उठाया था, जो इस वर्ग में देश के लिए एक नया रिकॉर्ड था। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें इस वर्ष ग्लास्गो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। हालांकि, यही प्रदर्शन अब उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है।
खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) को दी गई शिकायत के अनुसार, साईराज को पहले ही आशंका थी कि उन्हें डोपिंग में फंसाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रशिक्षण शिविर में शामिल एक कोच इस साजिश में शामिल हो सकता है। इस संबंध में उन्होंने खेल मंत्रालय, साईं और महासंघ से औपचारिक शिकायत भी की थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई थी।
शिकायत के लगभग चार महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई थी, इसी बीच राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) द्वारा किए गए आउट ऑफ कॉम्पिटिशन टेस्ट में साईराज पॉजिटिव पाए गए। उनके नमूने में स्टेरॉयड “मेस्टेनोलोन” पाया गया है।
फिलहाल साईराज पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि वह नाडा के हियरिंग पैनल के सामने खुद को निर्दोष साबित नहीं कर पाते हैं, तो वह कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग नहीं ले सकेंगे।
साईराज के अनुसार, पटियाला स्थित एनआईएस कैंप में एक साथी खिलाड़ी द्वारा सुनाई गई रिकॉर्डिंग से उन्हें इस साजिश की जानकारी मिली थी। कथित तौर पर एक महिला कोच किसी खिलाड़ी के भोजन में कुछ मिलाकर उसे डोपिंग में फंसाने की बात कर रही थी। हालांकि, जांच समिति द्वारा सबूत मांगे जाने पर उनके साथी ने वह रिकॉर्डिंग देने से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि साईराज ने पिछले वर्ष अगस्त में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था और २४ अक्टूबर को उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। इस वर्ष फरवरी में वह डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए, जिसकी रिपोर्ट अब सामने आई है। इससे पहले अक्टूबर और दिसंबर में हुए टेस्ट में वह नेगेटिव थे।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले रियो ओलंपिक से पहले पहलवान नरसिंह यादव ने भी भोजन में मिलावट कर डोपिंग में फंसाने का आरोप लगाया था। हालांकि, बाद में विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) के फैसले के बाद उन्हें प्रतिबंध का सामना करना पड़ा और उन्हें ओलंपिक से लौटना पड़ा।
अब यदि साईराज साजिश के आरोप को साबित नहीं कर पाते हैं, तो उन पर चार साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता है।










