मालिगांव: कामाख्या–हावड़ा मार्ग पर चलने वाली बंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को यात्रियों से व्यापक प्रतिक्रिया मिली है, जिन्होंने इस ट्रेन में यात्रा के दौरान अत्यधिक संतुष्टि और आनंद व्यक्त किया। बंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का उद्घाटन भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा १७ जनवरी २०२६ को किया गया था, जो भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण था।
यात्रियों ने इसके आधुनिक डिज़ाइन, बेहतर आराम, उन्नत यात्रा अनुभव और ऑनबोर्ड सुविधाओं की व्यापक प्रशंसा की, जिससे उनकी यात्रा और भी सुखद और यादगार बन गई। लंबी दूरी की रेल यात्रा को परिवर्तित करने की दिशा में यह कदम, विश्व स्तरीय यात्रा सुविधाएं प्रदान करने के भारतीय रेलवे के संकल्प का प्रतिबिंब है।
कामाख्या और हावड़ा के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों ने ट्रेन के सुचारू संचालन, सफाई, उन्नत सुरक्षा प्रबंध और स्लीपर क्लास के आराम को अपनी सकारात्मक यात्रा अनुभव के मुख्य कारण के रूप में उजागर किया। यात्रियों ने इस ट्रेन में पहली बार पेश किए गए नए प्रीमियम बेड रोल की विशेष रूप से प्रशंसा की, जिसमें संगानी प्रिंट के कम्बल कवर हैं, जो आरामदायक, स्वास्थ्यकर और देखने में सुंदर हैं।
यात्रियों ने ट्रेन की समयानुकूलता की भी सराहना की, जो नियमित संचालन शुरू होने के बाद से १००% समयानुकूलता बनाए रखती है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से यह ट्रेन रेल मदद प्लेटफ़ॉर्म पर लगातार बिना किसी शिकायत के चल रही है। हालांकि शुरुआत में कैटरिंग सेवा को लेकर कुछ शिकायतें थीं, लेकिन त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने के बाद अब कोई शिकायत नहीं मिली। ऑनबोर्ड पर परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वाद अब यात्रियों द्वारा व्यापक रूप से सराहे जा रहे हैं।
साथ ही, वेस्टिबुल टॉयलेट की सफाई यात्रियों द्वारा अत्यधिक प्रशंसित रही और बंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस में नियुक्त सभी आतिथ्य कर्मियों को यात्रियों के साथ विनम्र और दक्षता पूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्थित रूप से प्रशिक्षण दिया गया है।
इस उद्घाटन ने भारत सरकार की तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक रेल यात्रा की दृष्टि को उजागर किया, साथ ही स्थायी और समावेशी विकास को भी प्रोत्साहित किया। बढ़ती लोकप्रियता और यात्रियों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के साथ, कामाख्या–हावड़ा मार्ग की बंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस नवाचार, श्रेष्ठता और लंबी दूरी की रेल यात्रा के भविष्य का प्रतीक बनकर उभरी है।










