यदि मैं लोगों को शांति दे सकूं, वही मेरा आशीर्वाद है: शर्मिष्ठा बनर्जी राय

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सिलीगुड़ी: पिता प्रियतोष बनर्जी से ज्योतिष की शिक्षा प्राप्त करने के बाद शर्मिष्ठा बनर्जी राय को फिर पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता नहीं पड़ी। पिछले तीस वर्षों से वह अनेक लोगों की समस्याओं का समाधान कर निरंतर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि अपने पिता प्रियतोष बनर्जी को देखकर ही उन्हें इस क्षेत्र में प्रारंभिक प्रेरणा मिली।
उन्होंने कहा कि ज्योतिष के प्रति उनकी रुचि पहले से थी, लेकिन ज्योतिष का अध्ययन करना आसान बात नहीं है। इसके लिए गहन अध्ययन और निरंतर साधना की आवश्यकता होती है। कई लोगों की धारणा है कि कोई भी सहज ही ज्योतिषी बन सकता है, किंतु यह पूर्णतः असत्य है। ज्योतिष का अभ्यास करने के लिए दिन-प्रतिदिन अध्ययन करना पड़ता है। धीरे-धीरे यदि सीखा जाए, तभी इस क्षेत्र में एक स्थान बनाया जा सकता है।
शर्मिष्ठा बनर्जी राय ने बताया कि उनके पिता प्रियतोष बनर्जी उच्च कोटि के ज्योतिषी थे। उनकी बड़ी बहन भी बहुत कुछ समझती और जानती थीं। उनसे भी उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। समय के साथ उन्होंने इस विद्या की गहराई को समझा।
उन्होंने कहा कि उनके पास अनेक प्रसिद्ध व्यक्तित्व परामर्श के लिए आए हैं, जिनमें पवन चामलिंग और अजीत पवार जैसे नाम शामिल हैं। वे उन्हें आशीर्वाद देकर गए। इसके अतिरिक्त भी कई प्रतिष्ठित लोग अपनी समस्याओं के समाधान हेतु उनके पास आए।
उन्होंने कहा कि वह केवल एक ज्योतिषी के रूप में नहीं, बल्कि एक मित्र के रूप में लोगों के साथ खड़ी होती हैं और उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास करती हैं। जब तक उनका मन और सामर्थ्य साथ देगा, वह लोगों की सेवा करती रहेंगी।
शर्मिष्ठा बनर्जी राय ने आगे कहा कि यदि उनके कार्य से किसी का भला होता है, तो वही उनके लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद है। उनका मानना है कि केवल ज्योतिष का अभ्यास पर्याप्त नहीं है, बल्कि उससे लोगों के चेहरे पर मुस्कान लानी चाहिए। इसमें समय लगे तो भी कोई हानि नहीं।
उन्होंने कहा कि ज्योतिष साधना सरल कार्य नहीं है, इसलिए इस क्षेत्र में संयम और शांत मन अत्यंत आवश्यक है। यदि शांत चित्त से ज्योतिष का अभ्यास किया जाए, तो सफलता अवश्य मिलती है। किंतु सबसे पहले ईश्वर का आशीर्वाद आवश्यक है; यदि वह प्राप्त हो जाए, तो और किसी चीज की आवश्यकता नहीं रहती।

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