मेरा घोषणा पत्र: विकास कार्य को दें पहली प्राथमिकता    

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प्रदीप कुमार नायक         

आमतौर पर राजनीतिक दल चुनाव के दौरान अपने -अपने घोषणा पत्र के जरियें मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में अनेक प्रकार के वायदे करते हैं, और यह प्रक्रिया भारतीय गणतंत्र की स्थापना काल से ही जारी हैं। किन्तु प्राय: यह देखा जाता हैं कि चुनाव जितने के बाद राजनेता अपने चुनाव घोषणा पत्र में किये वायदे की समीक्षा गंभीरता पूर्वक नहीं करते हैं।नेताओं की बाते हैं बातों का क्या। हर नेता क्षेत्र में जाकर विकास के बड़े -बड़े सब्जबाग दिखाते हैं। ऐसे लुभावने वायदे किये जाते हैं। मानो आपकी परेशानियों को जानकर नेताजी फूट-फूटकर रो ही पड़ेगे।आज मेरा घोषणा पत्र में स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार, प्रदीप कुमार नायक ने अहम् मुद्दे उठाए हैं।महाराजाधिराज रामेश्वर सिंह द्वारा १८वीं शताब्दी में निर्मित वस्तुकला, स्थापत्य, रंग रोगन कलाकृति से निर्मित नियनाभिराम, मधुबनी जिला राजनगर का राज परिसर देखरेख के अभाव में खण्डहर में तब्दील होता चला आ रहा हैं। उक्त परिसर की संरक्षण, संबर्धक एवं विकास के वास्ते जनहित में पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किये जाने की आवश्यकता हैं। यहाँ यह भी बताना आवश्यक हैं कि राजनगर में ०२ अक्टूबर  १९९७ को तत्कालीन राजयपाल महामहिम डॉ. ए. आर. किदवई ने तत्कालीन केन्द्रीय कृषि मंत्री चतुरानन मिश्र एवं पशुपालन मंत्री बिहार सरकार राज कुमार महासेठ की उपस्थिति में कृषि महाविद्यालय का शिलान्यास किया था। जो अब तक पूरा नहीं हो सका, उसे अविलम्ब पूरा किया जाए।

* यहाँ एक महिला महाविद्यालय खोलने की प्रक्रिया भी हुई थी l जिसे अभी तक पूरा नहीं किया जा सका।

* ज्ञात हो कि वर्ष २००३ में तत्कालीन केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने मधुबनी जिला के राजनगर में एफ. एम. रेडियों प्रसारण केन्द्र का शिलान्यास किया था। इसकी स्थापना के लिए राधा कृष्ण ट्रस्ट के जमीन का चयन कर, वहाँ जल्द निर्माण प्रक्रिया प्रारम्भ करने के लिए तत्कालीन अपर समाहर्ता, मधुबनी ने अपने पत्र १३९४/०५ के द्वारा नगर परिषद, मधुबनी एवं अंचलाधिकारी, राजनगर को इसकी स्थापना के लिए कार्यपालक अभियंता को भी पत्र लिखा। इस जमीन के लिए अधिग्रहण और स्थापना में आवश्यक पहलूओं की जानकारी सूचना एवं प्रसारण विभाग को भी दी गई l परन्तु अब तक इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। अत : एफ. एम. रेडियों स्टेशन का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए।

* सभी गांवों तक बिजली की समुचित प्रबंधन कर सिचाई कार्य हेतु कम से कम २० घंटा बिजली दिया जाय तथा सभी जर्जर सड़क को बनाया जाय l

* मिथिला पेंटिंग को उद्योग का दर्जा देकर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाए।


** दरभंगा – जयनगर रेल खण्ड पर स्थित राजनगर रेलवे स्टेशन पर सभी महत्वपूर्ण रेल गाड़ियों की ठहराव निश्चित कराया जाए।
** सरकारी कार्यालयों में सूचना का अधिकार अधिनियम – २००५ का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।
** रामपट्टी को प्रखण्ड एवं झंझारपुर को जिला का दर्जा दिया जाए।
बहरहाल, सरकार भ्रष्टाचार समाप्त करने की जितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन प्रखण्ड एवं पंचायत से लेकर जिला स्तर तक के मुलाजिमों में चढ़ावा लेने की आदत नहीं सुधरने वाली हैं।
पांच साल तक ऐश करने वाले राजनेता की टोली जन सम्पर्क के लिए सिर्फ चुनाव के समय ही क्यों निकलती हैं? यात्रा निकालकर क्या वे जनता को वोट में बदल पाएंगे? वैसे भी कहते हैं कि “कर भला तो हो भला” लेकिन नेता आमजनों की भलाई के लिए क्या करते हैं? कुछ, करते हैं, तो सिर्फ अपनी भलाई के लिए।
ऐसे में किसका भला होगा, आम सभा, रैलियां व अन्य राजनीतिक यात्राएं क्या लोगों को लुभा पाएगी?

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