मूसलधार बारिश भी नहीं रोक पायी ममता – अभिषेक के जोशभरे कदमों को

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यह जुलूस बंगाल की अस्मिता और आत्मगौरव की आवाज बन गया

कोलकाता: कोलकाता की भींगी सड़कों पर बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक साथ भाजपा शासित राज्यों में बांग्लाभाषियों पर हो रहे हमलों के खिलाफ पदयात्रा की। इस दौरान मूसलधार बारिश हो रही थी, मगर जोश और संकल्प की गर्मी ने उनके कदमों को थमने नहीं दिया। बारिश, नारों और झंडों के बीच यह जुलूस बंगाल की अस्मिता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक पहचान की आवाज बन गया। कॉलेज स्क्वायर से डोरिना क्रॉसिंग तक लगभग ढाई किलोमीटर लंबा यह विरोध मार्च प्रतीक बन गया एकता, प्रतिबद्धता और राजनीतिक ताकत का। यह संयोग नहीं कि ममता और अभिषेक का साथ-साथ चलना पार्टी के अंदरूनी समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। इससे पहले ७ मार्च २०२४ को ब्रिगेड रैली के पहले और २२ जनवरी को राम मंदिर उद्घाटन के दिन भी दोनों ने एक साथ मार्च किया था।
ममता ने कहा, ये जो बारिश है, ये प्रकृति की देन है:
बुधवार सुबह से ही कोलकाता बादलों की चादर में लिपटा हुआ था। तृणमूल कांग्रेस के इस हाई-वोल्टेज जुलूस के लिए सुबह से ही कॉलेज स्क्वायर पर लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था। जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था, लोगों की भीड़ बढ़ती गई। जैसे ही दोपहर १४० बजे जुलूस शुरू हुआ, आकाश ने मानो साथ देने को बारिश भेज दी। मगर ममता और अभिषेक ने अपनी गति नहीं रोकी। दोनों भींगते रहे, मुस्कुराते रहे और जनता के बीच कदम से कदम मिलाते रहे। हजारों की भीड़, सांसद, मंत्री, पार्टी कार्यकर्ता, और आम लोग भींगते हुए नारे लगाते चले। काले कुर्ते में मंत्री अरूप विश्वास, फिरहाद हकीम, शशि पांजा, जावेद खान जैसे वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। सड़क के दोनों ओर बैरिकेड लगे थे, लेकिन भावना की बाढ़ में हर बाधा बह गई। एक पल ऐसा भी आया जब एक बुजुर्ग समर्थक ने बैरिकेड लांघकर ममता को प्रणाम किया। ममता मुस्कुरायीं और उसकी ओर बढ़ गयीं। नेता और जनता के रिश्ते की यह तस्वीर बारिश की बूंदों में भींग कर भी भावनात्मक रूप से और गहरी हो गई। डोरिना क्रॉसिंग पहुंचते-पहुंचते ममता ने जनता को संबोधित किया, हम धूप में जलते हैं, बारिश में भींगते हैं। यह बंगाल की मिट्टी हमें यही सिखाती है। उन्होंने लोगों को गर्म पानी से नहाने और दवा लेने की सलाह भी दी। हालाँकि, अभिषेक ने इस दिन कोई भाषण नहीं दिया। धर्मतल्ला में जुलूस के अंत में केवल ममता ही छायी रहीं। उन्होंने यह भी कहा कि, ये जो बारिश है, ये प्रकृति की देन है। हमें बारिश में भींगने की आदत है। अपने ४४ मिनट के भाषण के अंत में उन्होंने सभी को २१ जुलाई को ‘शहीद दिवस’ समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित भी किया।

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