मलाबार ग्रुप ने माइक्रो लर्निंग सेंटर्स को और अधिक राज्यों व क्षेत्रों में विस्तारित किया

IMG-20260226-WA0069

नयाँ दिल्ली: सड़क पर रहने वाले बच्चों के पुनर्वास और उन्हें फिर से पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने के प्रयास के तहत, मलाबार ग्रुप ने अपने माइक्रो लर्निंग सेंटर्स (एमएलसी) को नए राज्यों और क्षेत्रों में विस्तारित करने की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक कारणों से स्कूल से बाहर रह गए बच्चों को प्रारंभिक सहायता और संरचित देखभाल प्रदान करना और उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा में पुनः शामिल करना है।
इस विस्तार के तहत, राज्य और क्षेत्रीय समन्वयकों तथा स्वयंसेवकों के लिए कोझिकोड के कुट्टिक्कत्तूर स्थित मलाबार ग्रुप मुख्यालय में एक सप्ताह लंबा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों और फील्ड टीमों को एक साथ लाया गया है ताकि एमएलसी मॉडल को नए क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए और पहले से चल रहे केंद्रों की कार्यक्षमता को और मजबूत करने के लिए एक व्यवस्थित रोडमैप तैयार किया जा सके।
माइक्रो लर्निंग सेंटर्स, मलाबार ग्रुप की प्रमुख सामाजिक पहल ‘हंगर फ्री वर्ल्ड’ के तहत संचालित होते हैं। इस पहल का उद्देश्य कमजोर और पिछड़े समुदायों में भूख और शिक्षा की कमी से निपटना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सड़क पर रहने वाले बच्चे, बाल श्रमिक या स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पौष्टिक भोजन, प्रारंभिक शिक्षा और पारंपरिक स्कूलों में पुनः प्रवेश के लिए सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही उन्हें पुनर्वास और समाज में शामिल होने के लिए सहयोग भी मिलता है।
वर्तमान में, देश के १८ राज्यों में १,५३४ माइक्रो लर्निंग सेंटर्स संचालित हैं, जिनके माध्यम से ६४,००० से अधिक बच्चों को मदद मिल रही है, मुख्य रूप से शहरी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में। यूनिसेफ के अनुसार, भारत में लगभग २ करोड़ बच्चे सड़क पर रहते हैं, जिनमें से ८०% से अधिक शहरी क्षेत्रों में हैं। यह जनसंख्या घनी क्षेत्रों में दीर्घकालीन और व्यापक हस्तक्षेप की आवश्यकता को दर्शाता है।
इस विस्तार पर प्रतिक्रिया देते हुए मलाबार ग्रुप के चेयरमैन श्री एम. पी. अहमद ने कहा, “माइक्रो लर्निंग सेंटर्स के माध्यम से हमने अपने अनुभवों में देखा है कि सड़क पर रहने वाले बच्चों की स्थिति कितनी कठिन है। इस पहल को और अधिक क्षेत्रों तक पहुंचाना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है, ताकि कमजोर बच्चों को भोजन, शिक्षा और समाज में लौटने का अवसर सुनिश्चित किया जा सके। हम दृढ़ विश्वास करते हैं कि व्यवसायों को दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव पैदा करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और हम इस दिशा में अपने प्रयासों को लगातार मजबूत बनाए रखेंगे।”
स्थापना के बाद से ही, मलाबार ग्रुप अपने मुनाफे का ५% सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों में निवेश करता रहा है। ‘हंगर फ्री वर्ल्ड’ कार्यक्रम के तहत वर्तमान में यह समूह भारत, जाम्बिया और इथियोपिया में प्रतिदिन १,१५,००० से अधिक लाभार्थियों को भोजन उपलब्ध कराता है। इसके अलावा, ग्रैंडमा होम परियोजना के माध्यम से पिछड़े और जरूरतमंद महिलाओं को सुरक्षित आवास और आवश्यक सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।
मलाबार ग्रुप की सीएसआर गतिविधियों के प्रमुख क्षेत्र महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता हैं। अब तक समूह ने सामाजिक विकास कार्यक्रमों में ३७६ करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया है, जिससे १८ लाख से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

About Author

Advertisement