बाेलीं: अमानवीय आचरण के खिलाफ अदालत जाऊंगी
काेलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान हुए कथित ‘‘अमानवीय’’ आचरण को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में उत्पीड़न, भय, और प्रशासनिक मनमानी के कारण कई लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
सागर द्वीप में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, ‘‘हम एसआईआर के कारण हुए अमानवीय व्यवहार और इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों के खिलाफ अदालत में याचिका दायर करेंगे। यदि अदालत से अनुमति मिली, तो मैं उच्चतम न्यायालय में भी याचिका दायर करूंगी।’’ उन्होंने यह भी कहा कि वह एक प्रशिक्षित वकील हैं और इस मुद्दे पर वह एक आम नागरिक के रूप में भी आवाज उठाएंगी।
मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि याचिका राज्य सरकार द्वारा दायर की जाएगी या तृणमूल कांग्रेस द्वारा, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को बिना किसी कारण के मतदाता सूची से हटाया जा रहा है, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया है।
बुजुर्गों को परेशानी का सामना
ममता ने आरोप लगाया कि एसआईआर के कारण बुजुर्ग और गंभीर रोग से ग्रसित लोग लंबी कतारों में खड़े होने के लिए मजबूर हैं, ताकि वे साबित कर सकें कि वे वैध मतदाता हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए सवाल किया, ‘‘अगर कोई भाजपा नेताओं के बुजुर्ग माता-पिता को पहचान साबित करने के लिए लाइन में खड़ा कर दे, तो उन्हें कैसा लगेगा?’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है और अन्य को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
भेदभाव पर भाजपा पर हमला
ममता बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों के साथ कथित भेदभाव का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन्हें जान से मारने की चुनौती देती हूं, लेकिन मैं अपनी मातृभाषा बोलना बंद नहीं करूंगी।’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या देश में बांग्ला बोलना अब अपराध बन गया है?’’
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह चुनाव से पहले लोगों को प्रलोभन देती है और चुनाव जीतने के बाद दमनकारी कदम उठाती है। उन्होंने कहा, ‘‘वे चुनाव से पहले १०,००० रुपये देते हैं और चुनाव जीतने के बाद बुलडोजर चला देते हैं।’’
ममता बनर्जी का यह बयान पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बढ़ते विवाद और भाजपा के खिलाफ उनके हमले की ओर इशारा करता है, जो राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल को और भी गर्म कर सकता है।









