मध्य-पूर्व युद्ध से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव

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नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इस स्थिति का असर भारत में घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति को लेकर चिंताओं के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का कदम- एस्मा लागू:
स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने देशभर में आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। इस कानून के तहत आवश्यक सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारी हड़ताल या काम से इनकार नहीं कर सकते।
सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में भेजने का निर्देश दिया है ताकि गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
क्यों बढ़ी चिंता:
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मध्य-पूर्व में ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है।
इस कारण भारत में एलपीजी की मांग में लगभग १५ से २० प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है।
बुकिंग नियम में बदलाव:
घबराहट में खरीदारी और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अवधि २१ दिन से बढ़ाकर २५ दिन कर दी है।
तेल कीमतों पर फिलहाल राहत:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें १०० डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। हालांकि सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें न बढ़ाने का फैसला किया है।
तेल विपणन कंपनियां फिलहाल बढ़ती लागत का दबाव खुद वहन करेंगी।
भारत के पास कितना भंडार:
सरकार का कहना है कि भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग ७४ दिनों का भंडार मौजूद है, जिससे किसी भी वैश्विक संकट के दौरान आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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