मतदाता सूची में संशोधन के नए नियमों काे लेकर भड़कीं ममता बनर्जी

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दीघा: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई ‘विशेष गहन संशोधन’ प्रक्रिया के नए नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे एनआरसी से भी ज्यादा खतरनाक बताते हुए आरोप लगाया कि इससे देश के करोड़ों लोगों के मताधिकार पर खतरा हो सकता है। आज दीघा में ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा कि इस प्रक्रिया की शुरुआत बिहार से की जा रही है, क्योंकि वहां साल के अंत तक चुनाव होने हैं, लेकिन बाद में इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी योजना भाजपा के इशारे पर चलाई जा रही है और इसका उद्देश्य विपक्षी राज्यों, खासकर बंगाल को निशाना बनाना है। दरअसल, चुनाव आयोग के नए नियमों के तहत जिन लोगों का नाम २००३ से पहले मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें अपने जन्म स्थान और जन्म तिथि से संबंधित प्रमाण पत्र जमा कराने होंगे। १९८७ से पहले जन्मे लोगों को भी यह प्रमाण देना होगा और उसके बाद जन्मे लोगों को अपने माता-पिता का जन्म प्रमाण पत्र साथ लाना होगा। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि देश को आजादी १९४७ में मिली थी, तो फिर ८७ और २०२४ जैसे वर्षों को आधार क्यों बनाया जा रहा है? गरीब और ग्रामीण लोग अपने माता-पिता का जन्म प्रमाण पत्र कहां से बनवाएंगे? उन्होंने यह भी कहा कि पहले संस्थागत जन्म नहीं होता था, तो फिर दस्तावेज कहां से बनवाएंगे? ममता ने चेतावनी दी कि यह योजना युवाओं, कम पढ़े-लिखे, प्रवासी मजदूरों और आम लोगों को मतदान से वंचित करने की साजिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बंगाल के ग्रामीण मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और दूसरे राज्यों के लोगों के नाम जोड़े जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आम लोगों की सुविधा के लिए चुनाव आयोग से नियमों में बदलाव की मांग की है और इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया है। इतना ही नहीं, उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने और चुनाव आयोग पर थोपे गए इस फैसले का कड़ा विरोध करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमला बोलते हुए उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी बताया है और उन पर अमित शाह के निर्देश पर यह सारी साजिश रचने का आरोप लगाया है।

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