इम्फाल: साहित्य जीवन के समग्र अवदान के लिए २०२५ का अमर उजाला का सर्वोच्च शब्द सम्मान ‘आकाशदीप’—हिंदी में प्रख्यात कथाकार ममता काशिया और हिंदीतर भाषाओं में मणिपुरी की विख्यात रचनाकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी को दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र ने १९७५ को अंतरराष्ट्रीय महिला वर्ष घोषित किया था। २०२५ उसका स्वर्ण जयंती वर्ष रहा है। २०२६ को भी संयुक्त राष्ट्र ने महिलाओं के कृषि योगदान के लिए समर्पित किया है। इस आलोक में दोनों महिला सर्जकों को यह अलंकरण सम्मान को और विशिष्ट बनाता है। अलंकरण में पांच–पांच लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक के रूप में गंगा प्रतिमा सम्मिलित हैं। अपने विपुल लेखन से उत्तर–औपनिवेशिक वैचारिकी और स्त्री अस्मिता के लिए मणिपुरी में विशिष्ट योगदान देने वाली अरमबम ओंगबी मेमचौबी का मूल नाम डॉ. थौनोज़ाम चानू इबेमहल है। वे १ जनवरी १९५७ को जन्मी और मैतेई पुराकथाओं पर खास काम करने वाली अरमबम ओंगबी मेमचौबी समकालीन मणिपुरी सृजन परिदृश्य की सशक्त आवाज हैं। हिंदी के लिए सर्वोच्च अलंकरण ‘आकाशदीप’ के लिए चयनित, २ नवंबर १९४० को जन्मी ममता कालिया ने स्त्रीवाद की आरंभिक हलचलों के बीच अपने लेखन से नई लकीर खींची और एक दर्जन से अधिक उल्लेखनीय कृतियां दी हैं। वे मध्यवर्ग की जटिलताओं और स्त्री की पहचान के संघर्ष को सशक्त स्वर देने के लिए जानी जाती हैं।
आकाशदीप के अंतर्गत हिंदी के साथ अब तक कन्नड़, मराठी, बांग्ला, उड़िया, मलयालम तथा गुजराती को लिया जा चुका है, इस वर्ष मणिपुरी को चुना गया है। हिंदीतर भारतीय भाषाओं में गिरीश कर्नाड, भालचंद्र नेमाड़े, शंख घोष, प्रतिभा राय, एमटी वासुदेवन नायर और सितांशु यशचंद्र के साथ हिंदी में नामवर सिंह, ज्ञानरंजन, विश्वनाथ त्रिपाठी, शेखर जोशी, विनोद कुमार शुक्ल और गोविंद मिश्र आकाशदीप से अलंकृत हो चुके हैं।










