भारत ने रूसी तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई: व्हाइट हाउस

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न्यूयॉर्क: अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने भारत के साथ हुए नए व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि भारत ने रूस से तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के प्रमुख क्षेत्रों में ५०० अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश पर सहमति व्यक्त की है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच सीधी बातचीत के बाद यह बड़ा व्यापार समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल रूस से तेल खरीदना बंद करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि अमेरिका से तेल खरीदने पर भी सहमत हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि वेनेजुएला से तेल खरीद की संभावना भी जताई गई है, जिससे अमेरिका और उसकी जनता को सीधा लाभ होगा।
लेविट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में ५०० अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें परिवहन, ऊर्जा और कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने इसे राष्ट्रपति ट्रंप की कूटनीतिक सफलता बताते हुए एक “शानदार व्यापार समझौता” करार दिया।
इससे पहले, फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में लेविट ने कहा था कि दोनों नेताओं के बीच सोमवार को “बेहद सकारात्मक बातचीत” हुई, जिसके बाद द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की गई।
इसी बीच, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने ‘सीएनबीसी स्क्वॉक बॉक्स’ कार्यक्रम में कहा कि समझौते के तहत भारत द्वारा अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों, जैसे फल और सब्जियों पर शुल्क घटाकर लगभग शून्य किया जाना अमेरिका के लिए “बड़ी जीत” है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत में औद्योगिक वस्तुओं पर औसत शुल्क लगभग १३.५ प्रतिशत है, जिसे घटाकर ९८–९९ प्रतिशत वस्तुओं पर शून्य के करीब लाया जाएगा।
ग्रीर ने कहा कि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में भारत की सुरक्षा व्यवस्था बनी रहेगी, लेकिन मेवे, शराब, स्पिरिट, फल और सब्जियों सहित अधिकांश उत्पादों पर शुल्क लगभग शून्य होगा। उन्होंने इसे दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।

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