काेलकाता: कोन्ननगर के निवासी ७८ वर्षीय प्रवीर कुमार दत्त गुप्ता को वर्ष २०१८ में कमांड अस्पताल में दाएँ वेंट्रिकुलर सेप्टम में एक लीडलेस पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया था। यह डिवाइस कई वर्षों तक विश्वसनीय रूप से कार्य करता रहा। लेकिन जनवरी २०२६ में पेसमेकर अपने इलेक्ट्रिव रिप्लेसमेंट इंडिकेटर (इआरआई) पर पहुँच गया, जो बैटरी के क्षय और नए पेसिंग सपोर्ट की आवश्यकता का संकेत देता है।
यह उपलब्धि भारत सहित दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी तरह की पहली और एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। यह घटना जटिल कार्डियक डिवाइस प्रक्रियाओं के सफल संचालन में बीएम बिड़ला हृदय अनुसंधान केंद्र की विशेषज्ञता को दर्शाती है और भारत के चिकित्सा क्षेत्र को और सशक्त बनाएगी।
इस संबंध में अस्पताल के कार्डियोलॉजी निदेशक डॉ. अनिल मिश्रा ने कहा, “लीडलेस पेसमेकर ट्रांसवेनस सिस्टम से जुड़ी कई जटिलताओं को कम करने के उद्देश्य से विकसित किए गए थे, लेकिन उनकी दीर्घकालिक प्रबंधन प्रक्रिया अभी भी विकसित हो रही है। जब कोई डिवाइस कई वर्षों तक उपयोग में रहता है, तो फाइब्रोटिक एनकैप्सुलेशन के कारण उसे निकालना अनिश्चित और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता है। मुख्य बात है तैयारी — स्थिरीकरण की सीमा को समझना और संभावित जटिलताओं के लिए पूर्व योजना बनाना।”









