नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वर्ष २०२५ के बिहार विधानसभा चुनाव को चुनौती दी गई थी। याचिका में चुनाव से पूर्व राज्य सरकार द्वारा कथित रूप से कल्याणकारी योजनाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि केवल किसी राजनीतिक दल के आग्रह पर पूरे राज्य के लिए व्यापक निर्देश जारी नहीं किए जा सकते। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को यह कहते हुए पटना उच्च न्यायालय जाने की छूट दी कि मामला एक राज्य तक सीमित है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिला लाभार्थियों को १०-१० हजार रुपये हस्तांतरित कर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया गया। जन सुराज पार्टी ने इसे मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास बताते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की थी।
उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने २४३ सदस्यीय बिहार विधानसभा में २०२ सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन को ३५ सीटें मिलीं। जन सुराज पार्टी कोई भी सीट जीतने में असफल रही और उसके अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।









