ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के आम चुनावों में भारी बहुमत से जीत दर्ज करने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण की मांग एक बार फिर दोहराई है।
बीएनपी के वरिष्ठ नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि विदेश मंत्री पहले ही इस मामले को आगे बढ़ा चुके हैं और पार्टी भी इसका समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि क़ानून के अनुसार हसीना को बांग्लादेश वापस भेजा जाना चाहिए ताकि वे मुक़दमे का सामना कर सकें।
उल्लेखनीय है कि अगस्त २०२४ में हुए छात्र आंदोलन के बाद शेख़ हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। इसके बाद वे भारत आ गईं और तब से यहीं रह रही हैं।
मौत की सज़ा और आरोप:
पिछले वर्ष नवंबर में बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने शेख़ हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां ख़ान कमाल को उनकी अनुपस्थिति में मृत्युदंड सुनाया था। दोनों पर २०२४ के छात्र आंदोलन के दौरान भीड़ के दमन में मानवता के ख़िलाफ़ अपराध के आरोप लगाए गए थे।
शेख़ हसीना ने इस निर्णय को अवैध बताते हुए कहा था कि बिना उनका पक्ष सुने फैसला सुनाया गया।
अवामी लीग पर प्रतिबंध:
चुनाव में हसीना की पार्टी अवामी लीग को हिस्सा लेने से रोक दिया गया था। अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस कर रहे थे, ने आंदोलन के दौरान पार्टी की भूमिका की जांच के बीच उसकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया था।
बीएनपी नेता सलाहुद्दीन अहमद ने चुनाव प्रक्रिया को समावेशी बताते हुए आलोचनाओं को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अगस्त २०२४ के जनविद्रोह में जनता पहले ही अवामी लीग को अस्वीकार कर चुकी है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों का संदर्भ:
भारत और अवामी लीग के बीच संबंध ऐतिहासिक रहे हैं, जो १९७१ के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से जुड़े हैं। शेख़ हसीना के प्रधानमंत्री रहते दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध रहे। आंदोलन के बाद भारत ने उन्हें शरण दी थी।
बीएनपी ने हालांकि यह भी कहा है कि वह भारत सहित सभी देशों के साथ पारस्परिक सम्मान और समानता पर आधारित मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है।









