बांग्लादेश: तारिक रहमान की कैबिनेट में एक हिंदू और एक बौद्ध मंत्री शामिल

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ढाका: तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार में दो अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने एक हिंदू और एक बौद्ध नेता को मंत्री बनाया है।
निताई रॉय चौधरी (हिंदू समुदाय) और दीपेन दीवान (बौद्ध समुदाय) ने मंगलवार को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। दोनों बीएनपी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। बांग्लादेश की लगभग १८ करोड़ आबादी में करीब ८ प्रतिशत हिंदू हैं, जो देश का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है।
निताई रॉय चौधरी ने पश्चिमी मगुरा सीट से जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया। वह बीएनपी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य, पार्टी के उपाध्यक्ष तथा शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ सलाहकार माने जाते हैं। ७७ वर्षीय चौधरी पेशे से वकील हैं और उन्हें संस्कृति मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह युवा एवं खेल मामलों के मंत्री भी रह चुके हैं।
दूसरे मंत्री दीपेन दीवान चकमा समुदाय से आते हैं, जो मुख्य रूप से रंगामाटी पहाड़ी जिले में निवास करता है। ६२ वर्षीय दीवान ने रंगामाटी से बीएनपी के टिकट पर चुनाव जीता। पेशे से वकील दीवान को चटगांव पहाड़ी क्षेत्र कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है।
चुनाव में अल्पसंख्यकों की भागीदारी
बांग्लादेश चुनाव आयोग के अनुसार, १२ फरवरी को हुए आम चुनाव में ७९ अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की १० महिलाएं शामिल थीं। २२ राजनीतिक दलों ने ६७ उम्मीदवारों को नामित किया, जबकि १२ उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़े।
बीएनपी ने छह अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को टिकट दिया, जबकि जमात-ए-इस्लामी ने अपने इतिहास में पहली बार एक हिंदू उम्मीदवार को मैदान में उतारा। बांग्लादेश की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीबी) ने सबसे अधिक १७ अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे। इसके अलावा बांग्लादेश साम्यबादी दल (बीएसडी), बांग्लादेश माइनॉरिटी जनता पार्टी (बीएमजेपी) और बांग्लादेश समाजवादी दल (बीएसओडी) ने भी अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा।

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