बलागढ़ की नाव उद्योग को जीआई टैग दिलाने की पहल तेज

691666-boat-making-2

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जीके नेतृत्व में राज्य सरकार ने हुगली जिले के बलागढ़ स्थित पारंपरिक नाव निर्माण उद्योग के पुनर्जीवन की दिशा में ठोस कदम उठाने प्रारंभ कर दिए हैं। सदियों पुरानी इस कुटीर परंपरा को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कोलकाता के शिल्प सदन में हाल ही में बलागढ़ के नाव कारीगरों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें लघु एवं कुटीर उद्योग विभाग के अधिकारी, हुगली के महाप्रबंधक सुमनाथ गंगोपाध्याय तथा नाव सहकारी समिति के प्रतिनिधि और इतिहास शोधकर्ता पार्थ चटर्जी उपस्थित थे। बैठक में कारीगरों की समस्याओं, घटती आय, आधुनिक प्रतिस्पर्धा तथा संभावित विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
सरकार की ओर से सहकारी समिति को नाव निर्माण उपकरण खरीदने के लिए १० लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई। आधुनिक लकड़ी कटाई मशीनें उपलब्ध कराने, बलागढ़ में ‘बोट हब’ स्थापित करने तथा ‘विश्व बांग्ला’ विपणन केंद्र में कारीगरों को स्टॉल उपलब्ध कराने जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।
हुगली नदी तट पर स्थित बलागढ़, विशेषकर श्रीपुर क्षेत्र, लगभग ५०० वर्ष पुरानी नाव निर्माण परंपरा के लिए प्रसिद्ध रहा है। मुगल दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने भी अपने लेखन में यहां के कारीगरों का उल्लेख किया था। सरकार की इस पहल से स्थानीय कारीगरों में नई आशा जगी है और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की संभावना प्रबल हुई है।

About Author

Advertisement