नई दिल्ली: वर्ष २०२६–२७ का केंद्रीय बजट भारत के तकनीकी भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। इस बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन २.० की घोषणा की गई है। यह नया चरण स्पष्ट नीति संकेत देता है कि देश में सेमीकंडक्टर क्षमताओं को और गहराई से विकसित किया जाएगा। आधुनिक डिजिटल और औद्योगिक प्रणालियों की नींव चिप्स पर टिकी है, इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन २.० का फोकस देश में सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री के निर्माण, पूर्णतः भारतीय डिजाइन विकसित करने तथा घरेलू व अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर होगा। वित्त वर्ष २०२६–२७ के लिए इस मिशन में १,००० करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उद्योग-प्रेरित अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि तकनीकी विकास के साथ-साथ कुशल कार्यबल तैयार किया जा सके।
आधुनिक अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर की भूमिका:
सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों की आधारशिला हैं। कंप्यूटर, मोबाइल, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल, रक्षा प्रणालियाँ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सब कुछ इसी तकनीक पर निर्भर है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन १.० के माध्यम से देश ने पहले ही डिजाइन, विनिर्माण, असेंबली और परीक्षण क्षमताओं का विस्तार किया है। यह प्रगति ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप है। अब भारत नीति-निर्माण से आगे बढ़कर उत्पादन के चरण में पहुंच चुका है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन २.० अंतरराष्ट्रीय सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की स्थिति को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में और मजबूत करेगा।
भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रगति:
भारत तेजी से एक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। बड़े निवेश, बढ़ती उत्पादन क्षमता और ‘सेमिकॉन इंडिया २०२५’ जैसे प्रयासों ने इस विश्वास को और मजबूत किया है।
भारत के चिप बाजार का आकार:
२०२३: लगभग ३८ अरब डॉलर (करीब ३.१५ लाख करोड़ रुपये)
२०२४–२५: ४५ से ५० अरब डॉलर (करीब ३.७५ से ४.१५ लाख करोड़ रुपये)
२०३० तक: १०० अरब डॉलर (करीब ८.३ लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने की संभावना।
यह वृद्धि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की सोच से जुड़ी है। भारत अब सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन १.० की सफलता:
दिसंबर २०२१ में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस मिशन को मंजूरी दी थी, जिसके तहत ७६,००० करोड़ रुपये का प्रोत्साहन-आधारित ढांचा तैयार किया गया। दिसंबर २०२५ तक छ राज्यों में १० परियोजनाएं स्वीकृत, कुल निवेश लगभग १.६० लाख करोड़ रुपये।
इनमें सिलिकॉन फैब, उन्नत पैकेजिंग केंद्र और परीक्षण सुविधाएं शामिल।
२०२९ तक देश अपनी ७०–७५% घरेलू चिप मांग स्वयं पूरी कर सकेगा।
आगे के लक्ष्य:
३ नैनोमीटर और २ नैनोमीटर तकनीक का विकास
२०३५ तक भारत को दुनिया के शीर्ष सेमीकंडक्टर देशों में शामिल करना।
वित्त वर्ष २०२६–२७ में संशोधित सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण कार्यक्रम के लिए कुल ८,००० करोड़ रुपये का आवंटन।
प्रस्तावित परिणाम:
एक सेमीकंडक्टर फैब में ४,००० करोड़ रुपये का निवेश, लगभग १,५०० रोजगार।
नौ विनिर्माण इकाइयों में ११,००० करोड़ रुपये का निवेश, लगभग ३,००० रोजगार।
कुल ३० डिजाइन कंपनियों को समर्थन।
१० नए सेमीकंडक्टर डिजाइन विकसित।
२०० इंजीनियरों के लिए रोजगार के अवसर।
यह मिशन क्यों महत्वपूर्ण है:
सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालक हैं। बिजली व्यवस्था, वित्तीय बाजार, अस्पताल, परिवहन और अंतरिक्ष तकनीक—सब इन्हीं पर निर्भर हैं। कोरोना महामारी के दौरान चिप संकट ने १६९ से अधिक उद्योगों को प्रभावित किया था, जिससे उत्पादन घटा और लागत बढ़ी।
वर्तमान में वैश्विक सेमीकंडक्टर उत्पादन ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और अमेरिका पर निर्भर है। अकेले ताइवान दुनिया के ६०% चिप्स का उत्पादन करता है, जबकि उन्नत चिप्स में यह हिस्सेदारी लगभग ९०% है—यह निर्भरता जोखिमपूर्ण है। इसी कारण भारत अपनी मजबूत घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित कर रहा है।
भारतीय माइक्रो प्रोसेसर:
सी-डैक द्वारा विकसित ‘ध्रुव६४’ नामक ६४-बिट माइक्रोप्रोसेसर ५जी, ऑटोमोबाइल, औद्योगिक प्रणालियों और इंटरनेट ऑफ थिंग्स में उपयोग के लिए तैयार है। इसके अलावा शक्ति, अजीत, विक्रम और तेजस जैसे स्वदेशी प्रोसेसर भी विकसित किए गए हैं, जो ‘डिजिटल इंडिया आरआईएससी-भी’ कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
कुशल मानव संसाधन का विकास देशभर में प्रशिक्षण कार्यक्रम:
३९७ विश्वविद्यालयों में डिजाइन टूल्स की आपूर्ति, ४६ विश्वविद्यालयों में ५६ चिप्स का निर्माण।
कालीकट स्थित एनआईइएलआईटी में १ लाख इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य।
अब तक ६२,००० इंजीनियर प्रशिक्षित लैम रिसर्च के साथ साझेदारी में ६०,००० विशेषज्ञों को तैयार करने की योजना।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन २.० भारत को केवल एक उत्पादक नहीं, बल्कि एक तकनीकी नवोन्मेषक के रूप में स्थापित करेगा। २०२६–२७ का बजट इस दिशा में बड़ी गति प्रदान करता है। आने वाले दशक में भारत दुनिया के शीर्ष सेमीकंडक्टर देशों में अपनी मजबूत जगह बनाने की ओर बढ़ रहा है।











