बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव, २३ और २९ अप्रैल; मतगणना ४ मई

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कोलकाता: आगामी विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों में मतदान कराने का निर्णय भारत के निर्वाचन आयोग ने लिया है। रविवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि राज्य में पहले चरण का मतदान २३ अप्रैल को और दूसरे चरण का मतदान २९ अप्रैल को होगा। पांच राज्यों के चुनाव परिणाम ४ मई को घोषित किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि २०२१ के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान हुआ था, जिसे लेकर तीव्र विवाद उत्पन्न हुआ था। इस बार चरणों की संख्या घटाकर दो करने का निर्णय लिया गया है। विपक्षी राजनीतिक दल लंबे समय से चरणों की संख्या कम करने की मांग करते आ रहे थे।
हाल ही में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पश्चिम बंगाल के दौरे पर आए थे और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। उस बैठक में वामपंथी प्रतिनिधियों ने एक या दो चरणों में मतदान कराने की मांग की। दूसरी ओर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने इस विषय पर स्पष्ट कोई मांग न रखते हुए मुख्यतः विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया पर चर्चा की।
निर्वाचन आयोग के अनुसार पहले चरण में २३ अप्रैल को दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, अलीपुरद्वार, मालदा, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, दोनों मेदिनीपुर, पश्चिम बर्धमान, बांधकुड़ा, पुरुलिया और झाड़ग्राम जिल्लाें में मतदान होगा। दूसरे चरण में २९ अप्रैल को कोलकाता, उत्तर और दक्षिण चौबीस परगना, हावड़ा, हुगली, पूर्व बर्धमान और नदिया जिल्लाें मे मतदान कराया जाएगा।
पहले चरण में कुल १५२ सीटों पर मतदान होगा। इनमें उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा जिल्लाें की सभी सीटें शामिल हैं। इसके साथ ही मुर्शिदाबाद जिले की २२ सीटों पर भी पहले चरण में मतदान होगा। इसके अतिरिक्त दक्षिण बंगाल के वीरभूम, पश्चिम बर्धमान, पुरुलिया, बांधकुड़ा, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्व मेदिनीपुर जिल्लाें की सीटें भी पहले चरण में शामिल की गई हैं।
दूसरे चरण में उत्तर और दक्षिण चौबीस परगना, कोलकाता, हावड़ा, हुगली, पूर्व बर्धमान और नदिया जिल्लाें की कुल १४२ सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इनमें उत्तर चौबीस परगना में सबसे अधिक ३३ और दक्षिण चौबीस परगना में ३१ सीटें हैं।
इस विषय पर तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता तन्मय घोष ने कहा कि मतदान कितने चरणों में होगा, इसे लेकर उन्हें विशेष चिंता नहीं है। उनके अनुसार जनता ही मतदान करेगी और परिणाम तय करेगी। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नेता शमीक भट्टाचार्य ने कहा कि जब अन्य राज्यों में एक ही चरण में मतदान हो रहा है, तब पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होना शर्म की बात है।
निर्वाचन आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल ७ मई को समाप्त होगा। २५ फरवरी तक राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग ६ करोड़ ४४ लाख थी। मतदान की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रत्येक दो घंटे पर पीठासीन अधिकारियों को मतदान प्रतिशत की जानकारी देनी होगी। मतदान केंद्र के भीतर सभी कर्मियों के लिए गले में चित्रयुक्त पहचान पत्र रखना अनिवार्य होगा।
मतदाता सूची में अयोग्य व्यक्तियों के नाम न रहें, इस पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। संविधान के अनुच्छेद ३२६ के निर्देश के अनुसार विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया के माध्यम से सूची का सत्यापन किया गया है, ऐसा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया।
इसके अतिरिक्त मतदान केंद्र के भीतर मोबाइल दूरभाष लेकर प्रवेश करना निषिद्ध रहेगा। मतदाताओं को केंद्र के बाहर मोबाइल दूरभाष रखकर मतदान करने जाना होगा। वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी—पीने का पानी, प्रकाश, शौचालय, चलने के लिए कुर्सी और प्रतीक्षा के लिए विशेष बैठने की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। अधिकतर स्थानों पर उनके मतदान की व्यवस्था भूतल पर ही की जाएगी।
निर्वाचन आयोग ने यह भी बताया कि पांच राज्यों के इस चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग १७ करोड़ ४० लाख है। शत-प्रतिशत जाल निरीक्षण की व्यवस्था रहेगी। चुनाव संचालन के लिए लगभग १५ लाख कर्मी नियुक्त किए जाएंगे और सुरक्षा की जिम्मेदारी लगभग साढ़े आठ लाख सुरक्षा कर्मियों पर होगी। इसके अलावा मतदान प्रक्रिया की निगरानी के लिए लगभग ४९ हजार सूक्ष्म पर्यवेक्षक और १,४४४ पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। मतगणना के कार्य में लगभग ४० हजार गणनाकर्मी और १५ हजार सूक्ष्म पर्यवेक्षक अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।

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