प्रधानमन्त्री मोदी ने पेश किया ‘मानव’ विजन, क्या बताया इसका अर्थ

w=1168,h=779

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की पहुंच सभी तक सुनिश्चित किए जाने की वकालत करते हुए बृहस्पतिवार को ‘मानव विजन’ का अनावरण किया। इस विजन में संप्रभुता और समावेशिता पर विशेष जोर देते हुए तेजी से उभरती इस प्रौद्योगिकी के उपयोग और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को अपनाने की परिकल्पना की गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस शिखर सम्मेलन में कहा कि भारत का मानना है कि एआई तब ही दुनिया के भले के लिए काम करेगा जब इसे साझा किया जाएगा और इसके कोड सार्वजनिक होंगे। भारत एआई से डरता नहीं, बल्कि इसमें भविष्य की संभावनाएं देखता है।
‘मानव’ दृष्टिकोण के तत्व:
प्रधानमंत्री ने ‘मानव’ (मानव) दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसमें प्रत्येक अक्षर का एक विशिष्ट अर्थ है:
एम – मोरल एंड इथिकल सिस्टम्स (नैतिक एवं नीतिपरक प्रणालियाँ)
ए – अकाउंटेबल गर्वनेंस (जवाबदेह शासन)
एन – नेशनल सॉवेरिनिटी (राष्ट्रीय संप्रभुता)
ए – एक्सेसबल एंड इन्क्लूसिव (सुलभ और समावेशी)
वी – वैलिड एंड लेजिटिमेट (वैध और कानूनी)
उन्होंने यह भी कहा कि एआई को साझा किया जाना चाहिए ताकि लाखों युवा इसे और बेहतर बना सकें। एआई में भारत की भूमिका को लेकर मोदी ने गर्व से कहा कि भारत न केवल एआई क्रांति का हिस्सा है, बल्कि उसे नेतृत्व भी दे रहा है।
एआई की दिशा:
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें एआई को खुला आकाश देना है, लेकिन साथ ही उसे नियंत्रित भी रखना होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे जीपीएस दिशा दिखाता है, लेकिन निर्णय उपयोगकर्ता का होता है, वैसे ही एआई के मामले में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि मानवता हमेशा नियंत्रण में रहे।
एआई और समृद्धि:
भारत का मानना है कि एआई से केवल डर नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समृद्धि का माध्यम बनेगा। मोदी ने कहा, “हमारे पास प्रतिभा है, ऊर्जा है और नीतिगत स्पष्टता भी है।” उन्होंने इस शिखर सम्मेलन में भारत की तीन कंपनियों द्वारा पेश किए गए एआई मॉडल और ऐप्लिकेशन का भी जिक्र किया, जो भारत की युवा प्रतिभा का प्रतीक हैं।
भविष्य की दिशा:
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि एआई हमारे तंत्रों को स्मार्ट, दक्ष और प्रभावी बनाएगा। यह नवोन्मेष, उद्यमिता और नए उद्योगों के सृजन का अवसर देगा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि AI का उपयोग बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ उनके विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
समावेशिता और सशक्तीकरण:
मोदी ने ‘ग्लोबल साउथ’ की बात की, जो विकासशील देशों का समूह है, और यह सुनिश्चित करने की बात की कि एआई इन देशों के लिए सशक्तीकरण का साधन बने। उन्होंने कहा कि एआई का विकास समावेशी होना चाहिए और इससे सभी देशों को समान अवसर मिलना चाहिए।

About Author

Advertisement