प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में भारत की एआई उपलब्धियों और डिजिटल सुरक्षा पर किया प्रकाश

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट’ शिखर सम्मेलन ने यह दिखाया कि एआई की मदद से देश में जानवरों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है और किसान अपने पशुपालन और डेयरी का हिसाब-किताब कैसे रख रहे हैं।
मोदी ने लोगों से ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के प्रति सतर्क रहने का भी आग्रह किया।
शिखर सम्मेलन में कई राष्ट्राध्यक्षों, एआई विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों ने भाग लिया। मोदी ने सम्मेलन में प्रस्तुत दो प्रमुख उत्पादों का उल्लेख किया:
डेयरी प्रबंधन में एआई: अमूल के बूथ पर दिखाया गया यह सिस्टम यह बताता है कि कैसे एआई की मदद से जानवरों का इलाज और २४ घंटे डेयरी का प्रबंधन किया जा सकता है।
भारतीय संस्कृति और ज्ञान का संरक्षण: विश्व के नेताओं को यह देखकर हैरानी हुई कि कैसे एआई की मदद से प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें आज की पीढ़ी के अनुरूप रूपांतरित किया जा रहा है।
डिजिटल सुरक्षा और केवाईसी:
मोदी ने डिजिटल धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जब बैंकों से केवाईसी अद्यतन या दोबारा कराने का संदेश आता है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है। उन्होंने कहा, “यह आपके पैसों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। कृपया झुंझलाएँ नहीं।”
खेल और टी२० विश्व कप:
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय मूल के कई खिलाड़ी अपने-अपने देशों का नाम रोशन कर रहे हैं। टी२० विश्व कप में यह साफ दिखाई दे रहा है। कनाडा टीम में भारतीय मूल के खिलाड़ियों की संख्या सबसे अधिक है। कप्तान दिलप्रीत बाजवा पंजाब के गुरदासपुर में जन्मे हैं, नवनीत धालीवाल चंडीगढ़ से हैं। हर्ष ठाकुर और श्रेयस मोवा जैसे कई खिलाड़ी भी कनाडा और भारत दोनों का गौरव बढ़ा रहे हैं। अमेरिका की टीम में भी भारत के घरेलू क्रिकेट खिलाड़ी शामिल हैं।
श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक स्मरण:
मोदी ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को श्रद्धांजलि दी, जिनकी जयंती २४ फरवरी को है। उन्होंने कहा, “अम्मा जयललिता तमिलनाडु के लोगों के दिलों में सदैव जीवित रहेंगी।”
साथ ही उन्होंने केरल में २५० वर्षों बाद पुनर्जीवित मामंगम परंपरा का जिक्र किया, जिसे अक्सर ‘केरल कुंभ’ कहा जाता है।

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