प्रधानमंत्री मोदी ने उद्योग और वित्त संस्थानों से निवेश, नवाचार और सहयोग की अपील की

Untitled-design-2026-02-27T131018.946

नई दिल्ली: नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को उद्योग जगत और वित्तीय संस्थानों से आग्रह किया कि वे निवेश और नवाचार के माध्यम से आगे आएं और बाजार विश्वास को मजबूत करने में सहयोग दें। यह बात उन्होंने बजट २०२६‑२७ के बाद आयोजित ‘वेबिनार’ में कही, जिसका विषय था ‘विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार एवं वित्त’।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब सरकार, उद्योग और ज्ञान क्षेत्र से जुड़े लोग मिलकर काम करते हैं, तो घोषणाएं कागज पर ही नहीं रह जातीं बल्कि जमीनी स्तर पर उपलब्धियों में बदल जाती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने अवसंरचना पर विशेष जोर दिया है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय ११ साल पहले दो लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर १२ लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। मोदी ने इसे निजी क्षेत्र के लिए नए अवसरों का संकेत बताया।
मोदी ने कहा, “भारतीय कंपनियों को नए निवेश और नवाचार के साथ आगे आना चाहिए। वित्तीय संस्थानों को व्यावहारिक समाधान तैयार करने और बाजार विश्वास बढ़ाने में सहयोग देना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पिछले दशक में असाधारण मजबूती दिखाई है, जो दृढ़ विश्वास और सुधारों का परिणाम है। सरकार ने प्रक्रियाओं को सरल बनाया और व्यवसाय सुगमता को काफी हद तक आसान किया।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि एक स्पष्ट ‘रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर’ विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थान और शिक्षाविद शामिल हों। यह चार्टर 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा। मोदी ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय बजट कोई अल्पकालिक व्यापारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि एक नीतिगत खाका है, इसलिए बजट की प्रभावशीलता का मूल्यांकन ठोस और सार्थक मानकों पर किया जाना चाहिए।

About Author

Advertisement