नई दिल्ली: न्यूज़ीलैंड ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में शामिल होने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है। देश के विदेश मंत्री ने कहा है कि इस पहल के उद्देश्यों, संरचना और अधिकारों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है, इसलिए इसमें भागीदारी संभव नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ का उद्देश्य ग़ज़ा में इसराइल और हमास के बीच हुए संघर्षविराम को स्थायी बनाना तथा फ़लस्तीनी क्षेत्र में प्रस्तावित अंतरिम प्रशासन की निगरानी करना है। हालांकि, कई देशों ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका को सीमित करने के प्रयास के रूप में देखा है।
इससे पहले ट्रंप ने कनाडा को भेजा गया निमंत्रण स्वयं वापस ले लिया था। यह कदम दावोस में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा ‘नए विश्व व्यवस्था’ पर दिए गए मुखर भाषण के बाद उठाया गया।
‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की औपचारिक शुरुआत २२ जनवरी को दावोस में की गई थी, जहाँ केवल १९ देशों ने भागीदारी की। जबकि ट्रंप ने लगभग ६० देशों को आमंत्रित किया था, अधिकांश देशों ने इस पहल से दूरी बनाए रखी।
आमंत्रित नेताओं में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फ़तह अल-सीसी, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी तथा ब्राज़ील और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति शामिल थे।
इस सूची में सबसे अधिक ध्यान इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के नाम पर गया है, जिन्होंने ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में शामिल होने पर सहमति जताई है।










