न्यायिक सेवाओं में गैर-सिक्किमी नियुक्ति सुरक्षा कानून का उल्लंघन: भाजपा अध्यक्ष डीआर थापा

images

गान्टाेक: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सिक्किम के अध्यक्ष डीआर थापा ने राज्य में हाल के वर्षों में की गई न्यायिक सेवाओं की नियुक्तियों को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने दावा किया है कि गैर–सिक्किमी व्यक्तियों को न्यायिक अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाना सिक्किम के सुरक्षात्मक कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।
एक प्रेस बयान जारी करते हुए थापा ने कहा कि सिक्किम गवर्नमेंट एस्टैब्लिशमेंट रूल्स, १९७४ की नियम ४(४)(बी) स्पष्ट रूप से सिक्किमी मूल के नागरिकों को रोजगार में प्राथमिकता देने के बारे में प्रावधान करता है, लेकिन बीते वर्षों में इस नियम का बार–बार उल्लंघन होता आया है।
उन्होंने १९९४ के सुरेन्द्रनाथ प्रसाद शर्मा केस का उल्लेख करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद ३७१एफ(के) के तहत पूरी तरह वैध माना है।
थापा के अनुसार सिक्किम के युवाओं के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए कानून को नज़रअंदाज़ करना संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।
थापा ने कहा, “न्यायिक सेवा राज्य के अधीन सेवा है, इसलिए अनुच्छेद २३३ और २३३ के अनुसार स्थानीय सिक्किमी नागरिकों को प्राथमिकता मिलनी ही चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि न राज्य सरकार और न ही उच्च न्यायालय इस महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक नियम का पालन कर रहे हैं, जो आश्चर्यजनक और चिंताजनक है।
थापा ने यह भी स्पष्ट किया कि सिक्किम एक विशेष श्रेणी का राज्य है, जहाँ अन्य राज्यों में लागू सामान्य सिद्धांत स्वचालित रूप से लागू नहीं किए जा सकते।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का स्तंभ होने के नाते कानून और संविधान के पालन में सर्वोच्च जिम्मेदारी रखती है।
साथ ही उन्होंने सिक्किम हाई कोर्ट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि अनुच्छेद ३७१एफ की भावना के अनुरूप सिक्किम में कानून का कठोरता से पालन किया जाना अनिवार्य है।
अंत में, उन्होंने राज्य सरकार और उच्च न्यायालय से संवैधानिक रूप से संरक्षित प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की अपील की तथा बढ़ती युवाओं की निराशा को देखते हुए न्यायिक सेवाओं में स्थानीय सिक्किमी विधि स्नातकों और वकीलों को प्राथमिकता देने की मांग की।

About Author

Advertisement