नवनियुक्त गवर्नर डॉ. विश्वनाथ पौडेल की अग्निपरीक्षा

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नवनियुक्त गवर्नर डॉ. विश्वनाथ पौडेल की अग्निपरीक्षा

काठमांडू: नेपाल के बैंकिंग क्षेत्र, जो वर्षों से अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ माना जाता था, आज स्वयं गंभीर संकट में है। ऐसे कठिन समय में अर्थशास्त्री डॉ. विश्वनाथ पौडेल को नेपाल राष्ट्र बैंक का १८वां गवर्नर नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब देश की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में है और बैंकिंग प्रणाली बढ़ते खराब कर्ज (NPL) से जूझ रही है।
गवर्नर नियुक्ति की पृष्ठभूमि:
गवर्नर चयन की प्रक्रिया इस बार असामान्य रही। पूर्व कार्यकारी निर्देशक डॉ. गुणाकर भट्ट का नाम गवर्नर पद के लिए सबसे आगे था, लेकिन कार्यवाहक गवर्नर डॉ. नीलम ढुंगाना तिमिल्सिना की इस्तीफे को अस्वीकृत कर दिए जाने से वे दौड़ से बाहर हो गए। डॉ. पौडेल पहले गवर्नर सिफारिश समिति के सदस्य थे, लेकिन बाद में उन्होंने इस्तीफा देकर खुद को इस दौड़ में लाया और अंततः कैबिनेट ने उन्हें नियुक्त किया।
मुख्य आर्थिक चुनौतियाँ:
बैंकिंग संकट: बैंकों के पास करीब ७ खरब रुपये की तरलता होने के बावजूद कर्ज की मांग नहीं बढ़ रही है। कर्ज की गुणवत्ता गिर रही है और खराब कर्ज अनुपात लगभग ५% तक पहुँच चुका है।
आर्थिक मंदी: आर्थिक वृद्धि दर मात्र ४.६७% रहने का अनुमान है। व्यवसायिक विश्वास गिरा है, निवेश रुका हुआ है और उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था में उत्पादन का योगदान घटकर सिर्फ ५% पर आ गया है।
विनिमय दर: नेपाली रुपया लंबे समय से भारतीय मुद्रा के मुकाबले स्थिर है, जबकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव आ चुके हैं। इस पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई जा रही है।
स्वायत्तता का संकट: राष्ट्र बैंक की स्वायत्तता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक ऐन, 2058 और बैंक तथा वित्तीय संस्था ऐन, २०७३ में संशोधन प्रक्रिया चल रही है, जिसमें गवर्नर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
डॉ. पौडेल की भूमिका और अपेक्षाएं:
डॉ. पौडेल अर्थशास्त्र के विद्वान हैं लेकिन उन्हें मौद्रिक नीति के विशेषज्ञ नहीं माना जाता। ऐसे में मौद्रिक नीति को आर्थिक पुनर्जीवन की दिशा में प्रभावी बनाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
उन्हें चाहिए कि वे:
लचीली मौद्रिक नीति अपनाएं जिससे तरलता बाजार में पहुंचे और कारोबारी विश्वास बढ़े।
खराब कर्ज वसूली की दिशा में ठोस पहल करें ताकि बैंकिंग प्रणाली की पूंजी संरचना मजबूत हो।
सरकार से समन्वय बढ़ाएं ताकि नीतिगत द्वंद्व समाप्त हो और एकीकृत दृष्टिकोण से आर्थिक समस्याओं का समाधान हो।
डिजिटल भुक्तान प्रणाली को आधुनिक बनाएं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप वित्तीय अपराधों की रोकथाम सुनिश्चित करें।
एफएटीएफ ग्रे लिस्ट से नेपाल को बाहर निकालने हेतु नीतिगत और क्रियान्वयन स्तर पर गंभीर प्रयास करें।
नेपाल की वर्तमान आर्थिक स्थिति और बैंकिंग संकट को देखते हुए डॉ. विश्वनाथ पौडेल के लिए यह एक आसान जिम्मेदारी नहीं होगी। उन्हें सिर्फ मौद्रिक नीति सुधारने भर से काम नहीं चलेगा; उन्हें संरचनात्मक परिवर्तन, राजनीतिक समन्वय, निवेश बढ़ाने और वित्तीय प्रणाली को विश्वसनीय बनाने के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी।
उनकी नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता की एक महत्वपूर्ण परीक्षा है – न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे देश के लिए।

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