नई संसद में विपक्ष की भूमिका: संख्या कम, प्रभाव अधिक?

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काठमांडू: नई निर्वाचित प्रतिनिधि सभा में सत्ता पक्ष, राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा), लगभग दो-तिहाई बहुमत के साथ मजबूत स्थिति में है। रास्वपा के १८२ सदस्यों की तुलना में प्रमुख विपक्षी नेपाली कांग्रेस के ३८, नेकपा एमाले के २५, नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के १७, श्रम संस्कृति पार्टी के ७ और राष्ट्रिय प्रजातन्त्र पार्टी (राप्रपा) के ४ सदस्य हैं।
विपक्षी दलों ने अपने आप को रचनात्मक और जनमुखी बनाने का भरोसा दिलाया है। कांग्रेस के सांसद अर्जुननरसिंह केसी ने कहा, “कानून का शासन, भ्रष्टाचारमुक्त समाज और सुशासन के लिए हम सरकार का सहयोग करेंगे। जनता की इच्छा का सम्मान करना हमारा राजनीतिक धर्म है।”
नेकपा एमाले की नेता पद्मा अर्याल ने कहा, “हमारी संख्या कम है, लेकिन देश और जनता के हित में हमारा दायित्व कम नहीं होगा। हम सरकार को सही ट्रैक पर लाने का प्रयास करेंगे।”
नवनिर्वाचित नेकपा के सांसद वर्षमान पुन ने भी रचनात्मक विपक्षी भूमिका निभाने का वचन दिया। उन्होंने कहा, “अगर सरकार शासकीय सुधार और सुशासन में काम करेगी तो हमारा पूर्ण समर्थन रहेगा, अन्यथा हम चेतावनी देंगे।”
विश्लेषकों का कहना है कि विपक्ष की ताकत केवल संख्या पर निर्भर नहीं करती। मुद्दों को उठाने की क्षमता और जनता की आवाज़ संसद में पहुँचाने की क्षमता ही निर्णायक भूमिका तय करती है।
नई प्रतिनिधि सभा का सत्र जल्द ही बुलाया जाएगा, जिसमें सत्ता और विपक्ष अपनी भूमिका स्पष्ट करेंगे।

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