जातिवाद समाप्ति और सुशासन के मुद्दे पर आधारित आंदोलन के बाद बनी सुशीला कार्की की सरकार के दो विवादों ने कुछ जेन जी युवाओं में असंतोष पैदा कर दिया है।
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के विरोध में काले पट्टी पहनकर सिंहदरबार जाने के प्रयास के दौरान जेन जी नेता मिर्ज ढुङ्गाना को मंगलवार को पुलिस ने हिरासत में लिया। हालांकि, जेन जी नेता रिज़न रानामगर का कहना है कि वे प्रधानमंत्री के इस्तीफे के पक्ष में नहीं हैं।
“हम सुशासन के पक्ष में हैं, लेकिन असंतुष्ट साथी प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करके देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं, इस पर हमारा मतभेद है,” रानामगर ने कहा।
उनके असंतोष का केंद्र दो विवाद हैं। पहला, राजधानी के एक निजी फर्टिलिटी क्लिनिक से जुड़ा मामला, जिसमें दो नाबालिगों से अंडे लिए गए। अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने इस मामले में मुकदमा नहीं चलाने का निर्णय लिया, जिसे जेन जी नेता ने स्वार्थ का द्वंद्व मानते हुए आलोचना की।
दूसरा विवाद प्रधानमंत्री कार्की के प्रमुख निजी सचिव आदर्श श्रेष्ठ से जुड़ा है। उन पर अपने रिश्तेदारों को सचिवालय में नियुक्त करने का आरोप है, जिसको लेकर जेन जी युवाओं ने स्पष्टीकरण और जिम्मेदारी मांगी।
राजनीतिक वैज्ञानिक कृष्ण खनाल का कहना है कि ये विवाद सरकार की छवि पर असर डाल सकते हैं। हालांकि, उन्होंने मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख की नियुक्तियों को नियमित प्रक्रिया का पालन करते हुए सकारात्मक रूप में देखा।
जेन जी नेता रानामगर ने कहा कि असंतुष्ट युवाओं की समस्याओं को संवाद के जरिए हल करना उचित होगा।









