नयी दिल्ली: भारत में अब रामसर आर्द्रभूमियों की संख्या ९८ हो गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के एटा जिले के पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के कच्छ क्षेत्र के छारी-ढांड को अंतर्राष्ट्रीय रामसर मान्यता प्राप्त हुई है। यह घोषणा विश्व आर्द्रभूमि दिवस से पहले की गई है, जो हर साल २ फरवरी को मनाया जाता है।
मंत्री ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है। भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के रामसर नेटवर्क का विस्तार २७६% हुआ है, २०१४ में जहां यह संख्या २६ थी, वहीं अब यह 98 हो गई है।
इन आर्द्रभूमियों में सैकड़ों प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियाँ निवास करती हैं, साथ ही चिंकारा, भेड़िये और रेगिस्तानी बिल्लियाँ जैसे वन्यजीवों की भी मौजूदगी है। ये आर्द्रभूमियाँ पर्यावरण संरक्षण और आर्द्रभूमियों के महत्व को दर्शाती हैं।
रामसर सम्मेलन १९७१ में ईरान के रामसर शहर में हुआ था, और भारत १९८२ से इसका सदस्य है।









