बनगांव के बाद सीएम की नजर अब कांग्रेस के गढ़ पर
कोलकाता: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में बनगांव में मतुआ समुदाय को आश्वस्त किया कि पार्टी उनके अधिकारों और सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करेगी। मतुआ समुदाय को संदेश देने के बाद अब उनका ध्यान दो अल्पसंख्यक-बहुल जिलों मालदा और मुर्शिदाबाद पर केंद्रित है।
सूत्रों के अनुसार, यदि कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता है तो वह दिसंबर के पहले सप्ताह में इन दोनों जिलों का दौरा करेंगी और बड़े स्तर पर जनसभाएँ करेंगी। राज्य में विधानसभा चुनाव अभी कई महीने दूर हैं, लेकिन राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म हो चुका है। भाजपा ने पिछले चुनावों में मतुआ समुदाय के एक हिस्से का समर्थन हासिल किया था, जिसके कारण टीएमसी इस बार शुरू से ही अपना जनाधार मजबूत करने में जुटी है।
मालदा और मुर्शिदाबाद कभी कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाते थे, लेकिन वर्तमान समय में कांग्रेस वहाँ काफी कमजोर हो चुकी है। इन क्षेत्रों में वाम दल सक्रिय हैं, वहीं भाजपा, आईएसएफ और एआईएमआईएम जैसी पार्टियाँ भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो गयी है।
टीएमसी के लिए चुनौती केवल विपक्ष नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी भी है। स्थानीय स्तर पर कई नेताओं के विवादित बयानों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार ममता बनर्जी ३ दिसंबर को मालदा के गाजोल में और ४ दिसंबर को मुर्शिदाबाद के बहरामपुर में जनसभाएँ करेंगी। इन सभाओं से वह क्या राजनीतिक संदेश देंगी, इस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हैं।










