तीन साल पूरे होने पर राज्यपाल बोस ने विकास और हिंसा मुक्त बंगाल का वादा दोहराया

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस ने अपने तीन साल के कार्यकाल पूरा होने पर रविवार को राज्य के विकास के लिए अपना संकल्प दोहराया। उन्होंने राज्य की सत्ताधारी पार्टी के साथ अस्थायी कड़वाहट को भुलाकर पूरे बंगाल से जुड़ी अपनी मधुर यादें साझा कीं।
राज्यपाल बोस ने कहा कि बंगाल में काम करने का अनुभव अत्यंत अच्छा रहा और वह ग्रामीण बंगाल को और नजदीक से देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं बंगाल के लिए, खासकर महिलाओं और बच्चों के लिए काम करूंगा। मैं एक हिंसा-मुक्त और भ्रष्टाचार-मुक्त बंगाल बनाना चाहता हूं।”
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लोगों की चिंताओं के बीच बोस ने निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के बीच बैठक करने की अपील की। सीमा पर बांग्लादेश लौटने के लिए भीड़ जुटने की खबरों पर उन्होंने कहा कि वह वास्तविक स्थिति की जांच करने के बाद ही टिप्पणी करेंगे।
बीएलओ आत्महत्या मामले पर बयान:
एसआईआर के दौरान बीएलओ द्वारा कथित आत्महत्या और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सवालों पर बोस ने कहा कि “मुख्यमंत्री की चिंताओं की विस्तृत जांच होनी चाहिए। ऐसे मामलों में जल्दबाजी से बचना चाहिए।” उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का दृष्टिकोण संतुलित है और सभी मुद्दों की सही तरह से जांच कर उचित समाधान निकाला जा सकता है।
तृणमूल कांग्रेस का दावा:
तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि चार नवंबर से जारी एसआईआर प्रक्रिया में बीएलओ समेत ३० से अधिक लोग मारे गए। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से इन मौतों की जिम्मेदारी लेने की मांग की है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “एक और बीएलओ, महिला पैरा-शिक्षक रिंकू तरफदार ने कृष्णानगर में आत्महत्या की। सुसाइड नोट में उन्होंने निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया है।”
इसके अलावा जलपाईगुड़ी में एक बूथ-स्तरीय अधिकारी शांति मुणि एक्का ने एसआईआर कार्य के “असहनीय दबाव” के कारण आत्महत्या की थी, ऐसा दावा किया गया है।

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