डीए को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर, संघर्षशील संयुक्त मंच का कदम

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नयाँ दिल्ली: एक बार फिर महंगाई भत्ता (डीए) के मुद्दे पर लड़ाई सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गई है। कारण यह है कि अब तक बकाया डीए का २५ प्रतिशत भी नहीं दिया गया है। इसी के चलते डीए आंदोलनकारी सरकारी कर्मचारियों के संगठन “संघर्षशील संयुक्त मंच” ने फिर से सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस बार संगठन ने अवमानना याचिका दायर की है। इससे पहले १३ फरवरी को कानूनी नोटिस भेजकर तीन दिनों के भीतर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश को लागू करने की मांग की गई थी। निर्देश का पालन न होने पर संगठन ने अवमानना का सहारा लिया। राज्य सरकारी कर्मचारियों के परिसंघ ने भी अवमानना याचिका दायर करने का रास्ता अपनाया है। अदालत सूत्रों के अनुसार, मामले की सुनवाई अगले सप्ताह होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि बकाया महंगाई भत्ता चुकाने के लिए ५ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था। लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है कि आदेश जारी होने के एक सप्ताह बाद भी राज्य सरकार ने बकाया डीए के भुगतान के संबंध में कोई पहल नहीं की। इस परिस्थिति में १३ फरवरी को डीए मामले के याचिकाकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और वित्त सचिव प्रभात कुमार मिश्र को कानूनी नोटिस भेजा था। नोटिस में कहा गया था कि ५ फरवरी को जारी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का जानबूझकर और सुस्पष्ट उल्लंघन किया गया है, जो वस्तुतः अदालत की अवमानना के समान है।
मामले की खबर सामने आने के बाद भाजपा नेता सुकांत मजूमदार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह राज्य सरकार डीए नहीं देगी, इसलिए कर्मचारी अदालत में जाकर लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें हमारा पूरा समर्थन है। कुछ ही महीनों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। वह सरकार आने के बाद हमारे राज्य में कर्मचारियों को केंद्र के समान दर पर डीए देने की व्यवस्था करेगी।”

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