जैन समुदाय और शिक्षकों की अपील: सरकार ‘”जियो और जीने दो” के सिद्धांत का सम्मान करे

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काेलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार की कुछ नीतियों को लेकर जैन समुदाय में चिंता बढ़ रही है। समुदाय का आरोप है कि सरकार अल्पसंख्यक विकास के नाम पर विशेष समुदाय पर ही ध्यान केंद्रित कर रही है, जो जैन धर्म की ‘”जियो और जीने दो” नीति के विपरीत है।
शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की नेता अग्निमित्रा पॉल ने जैन धर्म के प्रतिनिधियों और शिक्षकों/धार्मिक गुरुजनों से मुलाकात की। शिक्षकों ने भी जोर देकर कहा कि जैन धर्म की मूल शिक्षा—अहिंसा, पारस्परिक सम्मान और सह-अस्तित्व—को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
अग्निमित्रा पॉल ने सरकार से अपील की कि तुरंत ऐसी किसी नीति या कदम को वापस लिया जाए, जो जैन धर्म के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हो। उन्होंने कहा कि जैन समुदाय भी अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की तरह सम्मान और अधिकार का हकदार है।
जैन समुदाय और शिक्षक स्पष्ट कर चुके हैं कि वे चाहते हैं कि राज्य सरकार उनके धार्मिक जीवन, स्वतंत्रता और स्वाभिमान का सम्मान करते हुए ‘”जियो और जीने दो”  के सिद्धांत को बनाए रखे।

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