काठमांडू: पिछले सितंबर में हुए युवा (जेनजी) आंदोलन के दौरान घटित घटनाओं की जांच कर रहे जांचबुझ आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का बयान लिया है। आयोग के अधिकारी उनके निवास पर पहुंचकर बयान दर्ज करने गए थे।
आयोग के प्रवक्ता विज्ञानराज शर्मा के अनुसार ओली को रविवार को ही बयान के लिए पत्र भेजा गया था। “उन्होंने आज ही अपना स्टेटमेंट दिया है,” शर्मा ने कहा। उनके मुताबिक ओली ने अपने बयान लिखित रूप में आयोग को सौंपे हैं।
इससे पहले ओली आयोग के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर बयान न देने की बात सार्वजनिक रूप से दोहराते रहे थे। आयोग ने उन्हें बिना अनुमति काठमांडू से बाहर न जाने के निर्देश के साथ स्थान-सीमा (लोकेशन प्रतिबंध) तय की है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय आयोग की बैठक से होने की बात प्रवक्ता शर्मा ने बताई।
इससे पहले नेकपा एमाले के एक पदाधिकारी ने पुष्टि की थी कि आयोग का पत्र ओली तक पहुंच चुका है। नाम न जाहिर करने की शर्त पर उन्होंने कहा था कि ओली आयोग कार्यालय नहीं जाएंगे, बल्कि आयोग के एक सहसचिव बयान लेने के लिए उनके घर जाएंगे।
सेप्टेम्बर ८ को युवाओं द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों की गोली लगने से कई लोगों की मौत हुई थी। इसके अगले दिन आंदोलन और उग्र हो गया, जिसके बाद काठमांडू समेत विभिन्न स्थानों पर हिंसक गतिविधियां, लूटपाट, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद ओली ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
नेकपा एमाले के अध्यक्ष समेत ओली और पार्टी के अन्य नेताओं ने गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाले इस आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसकी आलोचना की है। आयोग इससे पहले तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक और सुरक्षा निकायों के नेतृत्व से भी बयान ले चुका है।











