बर्लिन २४ जनवरी (विसं): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच जर्मनी में २०२६ फीफा वर्ल्ड कप के संभावित बहिष्कार (बॉयकॉट) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जर्मन फुटबॉल महासंघ (डीएफबी) की कार्यकारी समिति के सदस्य और बुंडेसलीगा क्लब एसटी. पाउली के अध्यक्ष ओके गेटलिस्ट ने कहा है कि इस मुद्दे पर अब गंभीर बहस की आवश्यकता है।
जर्मन दैनिक हैम्बर्ग मॉर्गेनपोस्ट को दिए एक साक्षात्कार में गेटलिस्ट ने कहा, “अब इस विषय पर गंभीरता से विचार और चर्चा करने का समय आ गया है।” उन्होंने कहा कि ट्रंप की हालिया कार्रवाइयों से यूरोप में अस्थिरता बढ़ी है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे का प्रस्ताव रखा है और इसका विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जिससे नाटो पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
गेटलिस्ट ने १९८० के ओलंपिक बहिष्कार का उल्लेख करते हुए कहा, “उस समय भी इसके पीछे कारण थे। मेरी राय में आज खतरा उससे भी अधिक है। पूरा विश्व राजनीतिक तनाव में है। इसलिए खेलों पर भी बातचीत ज़रूरी है।” गौरतलब है कि फीफा वर्ल्ड कप २०२६ का आयोजन अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में होना है, जबकि टिकटों की ऊँची कीमतों और यात्रा प्रतिबंधों को लेकर प्रशंसक पहले से ही चिंतित हैं।
गेटलिस्ट को यह भी पता है कि उनके विचारों को जर्मन फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष बेर्न्ड नॉयएंडोर्फ और फीफा प्रमुख जियानी इन्फेंटिनो की मंज़ूरी मिलना मुश्किल है। क़तर वर्ल्ड कप की राजनीति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “क़तर सभी के लिए बहुत राजनीतिक था और अब हम पूरी तरह अराजनीतिक हो गए हैं। यह बात मुझे चिंतित करती है।
एसटी. पाउली क्लब को शुरू से ही खेल और राजनीति को जोड़ने के लिए जाना जाता है। गेटलिस्ट के अनुसार, संभावित बहिष्कार का असर उनके क्लब में खेलने वाले ऑस्ट्रेलिया और जापान के खिलाड़ियों पर पड़ेगा, लेकिन यह महत्वहीन होगा। उन्होंने कहा, “पेशेवर खिलाड़ियों का जीवन उन लाखों लोगों से अधिक मूल्यवान नहीं हो सकता, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हमलों और धमकियों का सामना कर रहे हैं।”











