चिकन नेक में बढ़ती आपराधिक गतिविधियाँ: प्रणाली पर गंभीर सवाल

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देवेन्द्र के. ढुंगाना

नई दिल्ली: चिकन नेक कॉरिडोर: बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा से जुड़ा संवेदनशील क्षेत्र, जिसे आम तौर पर “चिकन नेक” कहा जाता है, एक बार फिर आपराधिक गतिविधियों और तस्करी नेटवर्क के कारण चर्चा में है। रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होने के बावजूद, यह क्षेत्र लंबे समय से अवैध कारोबार, घुसपैठ और संगठित अपराध के लिए अनुकूल माना जाता रहा है।
भारत की केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर इसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा करती रही हैं। हाल ही में भारत के केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा उच्चस्तरीय समीक्षा भी की गई थी। लेकिन इन प्रयासों के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला है।
भ्रष्टाचार और अवैध नेटवर्क की मिलीभगत:
स्थानीय स्तर पर यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी, तस्कर और माफिया मिलकर इस क्षेत्र की व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं। हाल ही में एक निलंबित पुलिस अधिकारी से जुड़ा मामला सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा गया है—आखिर प्रणाली के भीतर ऐसी प्रवृत्तियाँ कैसे पनप रही हैं?
आरोपों के अनुसार, सीमावर्ती जिलों में तैनात कुछ अधिकारी कम समय में ही असामान्य रूप से संपन्न हो गए हैं, जो उनकी वैध आय से मेल नहीं खाता। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि वे अवैध कारोबार जैसे शराब, बालू, लकड़ी, पशु और कोयला तस्करी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सकते हैं।
जांच एजेंसियों की सक्रियता:
इन आरोपों के सामने आने के बाद आर्थिक अपराध इकाई और अन्य केंद्रीय एजेंसियों ने अपनी जांच तेज कर दी है। विभिन्न राज्यों और सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध संपत्तियों की पहचान की जा रही है। शुरुआती जांच में कई अचल संपत्तियों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले हैं।
प्रणालीगत सुधार की आवश्यकता:
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना जरूरी है। सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों की नियमित संपत्ति जांच, निगरानी तंत्र को मजबूत करना और स्थानीय प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय आवश्यक है।
सुरक्षा बनाम वास्तविकता:
यह भी सच है कि आरोपित कुछ अधिकारियों के कार्यकाल में कुछ क्षेत्रों में अपराध दर में कमी आई है। लेकिन सवाल यह उठता है- क्या कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर अवैध कमाई को नजरअंदाज किया जा सकता है?
निष्कर्ष:
“चिकन नेक” केवल एक भौगोलिक कॉरिडोर नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यदि यहां भ्रष्टाचार और संगठित अपराध को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसके दीर्घकालिक परिणाम गंभीर हो सकते हैं। अब सख्त कार्रवाई के साथ-साथ प्रणालीगत सुधार अनिवार्य हो गया है।

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