नई दिल्ली: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अनुल्लेखित नायकों को श्रद्धांजलि देने हेतु गोरखा शहीद सेवा समिति और गोरखा प्राइड मिशन “एक संध्या स्वतंत्रता सेनानियों के नाम” शीर्षक से एक कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।
यह कार्यक्रम आजादी का अमृत महोत्सव का हिस्सा है, जो भारत की स्वतंत्रता की ७५वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। कार्यक्रम में गोरखा शहीदों के अदम्य साहस और बलिदान को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
यह कार्यक्रम रविवार, १५ फरवरी २०२६ को दोपहर २ बजे से शाम ७ बजे तक एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा। इसमें सम्मान समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा विशिष्ट अतिथियों के प्रेरणादायक वक्तव्य शामिल होंगे।
कार्यक्रम में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इसके अतिरिक्त केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव नीरज कुमार भी उपस्थित रहेंगे।
गोरखा शहीद सेवा समिति और गोरखा प्राइड मिशन का यह प्रयास गोरखा सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एंग्लो-नेपाल युद्ध से लेकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तक गोरखा वीरों ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया है। उनका मूलमंत्र था, “कायर बनकर जीने से मर जाना श्रेष्ठ है।”
कार्यक्रम में वीरगाथा पाठ, पारंपरिक गोरखा लोकनृत्य तथा विशेष स्मारक श्रद्धांजलि प्रस्तुत की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, “एक संध्या स्वतंत्रता सेनानियों के नाम” केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का दृढ़ संकल्प है।
कार्यक्रम समन्वयक ने बताया कि गोरखा समुदाय का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान अद्वितीय रहा है, और यह संध्या उनके बलिदान को ‘अमृत काल’ के २०४७ के विकसित भारत के स्वप्न से जोड़ने का प्रयास है।
इसके अतिरिक्त खुकरी प्रदर्शन, मार्शल आर्ट डेमो और गोरखा परंपराओं पर आधारित इंटरएक्टिव सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है, किंतु संभावित भीड़ को देखते हुए अग्रिम पंजीकरण की सलाह दी गई है।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ की भावना के अनुरूप है, जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास के दस्तावेजीकरण और प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया गया है। भारत जब २०४७ में स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर अग्रसर है, तब इस प्रकार के आयोजन संविधान के न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को और सुदृढ़ करते हैं।
गोरखा शहीद सेवा समिति और गोरखा प्राइड मिशन ने सभी देशभक्तों, इतिहासप्रेमियों और समुदाय के सदस्यों को इन अमर स्वतंत्रता रक्षकों को श्रद्धांजलि देने हेतु सादर आमंत्रित किया है।









