चाय बागानों की ३० प्रतिशत भूमि अन्य उद्देश्यों के लिए देने के फैसले का गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने जताया विरोध,  मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन 

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जलपाईगुड़ी:  गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर चाय बागानों की ३० प्रतिशत भूमि अन्य उद्देश्यों के लिए देने के फैसले को रद्द करने की मांग की है।
बुधवार को जलपाईगुड़ी जिलाशासक कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपकर चाय बागान की जमीन को अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने के फैसले का  विरोध जताया गया। राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग में जिलाशासक के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया।गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में एक निर्देश जारी कर कहा है कि चाय बागानों की ३० प्रतिशत भूमि का उपयोग अब अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा।
इसको लेकर धीरे-धीरे डुआर्स से लेकर तराई क्षेत्र तक गुस्सा बढ़ाता जा रहा है।
इस पृष्ठभूमि में सरकार के फैसले के खिलाफ बुधवार को गोरखा जनमुक्ति मोर्चा केंद्रीय समिति भी उतर आयी है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा द्वारा विरोध करने और  मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने से इस आंदोलन को और  बल मिला है। इस संदर्भ में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के केंद्रीय समिति के सचिव डा. शिवा सुनार ने कहा कि लगभग १५० वर्षों से डुआर्स और तराई क्षेत्रों में चाय बागानों में रहने और खेती करने वाले आदिवासी, गोरखा और राजबंशी जनजातियों की जमीनों का पंजीकरण किया जाना चाहिए और फिर सरकार को चाय बागानों की जमीन का अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने पर विचार करना चाहिए।
आज हम चाय बागानों में रहने वाले भूस्वामियों के बेटों के नाम पर तत्काल भूमि पंजीकरण की मांग कर रहे हैं, साथ ही चाय बागानों की भूमि के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को रद्द करने की भी मांग कर रहे हैं।

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